जोगबनी में बदहाल शिक्षा व्यवस्था: 6 महीने पानी में डूबा रहता है स्कूल, शिक्षिका के लिए पानी में बेंच लगाते दिखे बच्चे

बैंच के ऊपर चढ़कर स्कूल में प्रवेश करती शिक्षिका. | Prabhat Khabar Network
जोगबनी के प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी की स्थिति चिंताजनक है, जहां छह महीने तक स्कूल में जलजमाव रहता है. हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में बच्चों को शिक्षकों के लिए कीचड़ में बेंचों का पुल बनाते हुए दिखाया गया है, जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है.
जोगबनी नगर परिषद के वार्ड संख्या 11 स्थित प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी की स्थिति प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बद से बदतर हो चुकी है. यह विद्यालय साल के करीब छह महीने जलजमाव की चपेट में रहता है. वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या पर आज तक न तो किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि ने ध्यान दिया और न ही शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों ने इसके स्थाई समाधान की कोई जहमत उठाई.
घुटने भर कीचड़ और गंदे पानी से गुजरकर स्कूल जाने की मजबूरी
स्कूल की भौगोलिक स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहां पहुंचने के लिए बच्चों को हर दिन गंदे पानी और संक्रामक कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है. इससे मासूम बच्चों के पैर खराब हो रहे हैं और उनके बीमार पड़ने व महामारी की चपेट में आने का खतरा हमेशा बना रहता है. सबसे विकट स्थिति मानसून और बरसात के दिनों में होती है, जब लगातार पानी भरे रहने के कारण लगभग 6 महीने तक स्कूल में पठन-पाठन का कार्य पूरी तरह बाधित रहता है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो: बच्चों के कंधे पर शिक्षकों का 'वीआईपी' सफर
इन दिनों इस बदहाल स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने गुरु-शिष्य की परंपरा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं:
- बच्चों से मजदूरी: वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे मासूम बच्चे खुद पानी में खड़े होकर अपनी एक शिक्षिका के लिए स्कूल के मुख्य द्वार से भीतर तक बेंचों का पुल (रास्ता) बना रहे हैं.
- शिक्षकों की संवेदनहीनता: बच्चे पानी और कीचड़ में भीगने को मजबूर हैं, लेकिन शिक्षिका महोदया को पानी में पैर रखना गंवारा नहीं है. वे बच्चों द्वारा लगाए गए बेंचों पर पैर रखकर शान से स्कूल के अंदर प्रवेश कर रही हैं. इस संवेदनहीनता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है.
नगर परिषद ने पल्ला झाड़ा, कहा— "यह शिक्षा विभाग का मामला है"
इस दुर्दशा को लेकर जब स्कूल के पूर्व छात्र और वर्तमान वार्ड संख्या 10 के पार्षद मोहम्मद मुश्ताक से बात की गई, तो उन्होंने प्रशासनिक कड़वाहट को उजागर किया.
"भले ही यह स्कूल मेरे वार्ड के अंतर्गत नहीं आता है, लेकिन इस संस्थान का पूर्व छात्र होने के नाते इसकी यह नारकीय स्थिति मुझसे देखी नहीं गई. मैं खुद स्कूल के प्रभारी शिक्षक को साथ लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचा था. वहां कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) की अनुपस्थिति में मैंने बड़ा बाबू के समक्ष यह गंभीर मामला रखा. लेकिन नगर परिषद कार्यालय ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि जलजमाव और स्कूल का ढांचा शिक्षा विभाग के अधीन आता है, इसलिए वे इसमें कोई मदद नहीं कर सकते. मैं जिला पदाधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग करता हूं कि इस स्कूल को अविलंब ऊंचे स्थान पर स्थानांतरित किया जाए या यहां से जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था की जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू हो सके." — मोहम्मद मुश्ताक, नगर पार्षद (वार्ड 10), जोगबनी
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लेखक के बारे में
By सुदीप भारती
सुदीप भारती प्रिंट माध्यम में 12 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.
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