पत्नी की हत्या मामले में आरोपी पति को उम्रकैद

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पत्नी की हत्या मामले में आरोपी पति को उम्रकैद

अररिया थाना क्षेत्र के ग्राम ककुड़वा टोला बसंतपुर के 26 वर्षीय मो गालिब पिता मो इदरीश को सुनायी सजा

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अररिया. न्यायमंडल अररिया के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम (एडीजे 01) मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने अररिया थाना क्षेत्र के ग्राम ककुड़वा टोला बसंतपुर के 26 वर्षीय मो गालिब पिता मो इदरीश को उम्रकैद की सजा सुनायी है. गला घोंटकर पत्नी की हत्या कर उसके शव को पेड़ से लटका देने का मामला प्रमाणित होने पर यह सजा सुनायी गयी. दोषी को उम्रकैद की सजा के अलावा 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है. जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर आरोपित पति को तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतने का आदेश जारी किया गया है. यह सजा एसटी 679/2025 में दी गयी है.

16 दिसंबर 2022 को पेड़ से लटका मिला था शव

सरकार की ओर से एपीपी राजानंद पासवान ने बताया कि घटना 16 दिसंबर 2022 की है. बैरगाछी मैनापुर वार्ड संख्या 13 के मो परवेज आलम की 20 वर्षीय बेटी सुहाना उर्फ झुमकी का निकाह घटना के 06 माह पूर्व मो गालिब के साथ हुआ था. निकाह के बाद सुहाना उर्फ झुमकी ससुराल में रहने लगी. कुछ दिन तक ठीक रहा. फिर बाद में सुहाना उर्फ झुमकी से उसका पति मो गालिब दहेज मांगने लगा. बराबर मो गालिब सुहाना उर्फ झुमकी को मायके से पांच लाख रुपये लाने के कहता था. विरोध करने व दहेज की पूर्ति नहीं होने पर उसके साथ गाली-गलौज व मारपीट की जाती थी. 16 दिसंबर 2022 को करीब 11 बजे दिन में मो परवेज आलम को मालूम हुआ कि उसकी पुत्री का शव पनार नदी से पूर्व उत्तर में पेड़ पर लटका हुआ है. मो परवेज आलम ने घटना की सूचना बैरगाछी ओपी थाना में दी. पुलिस प्रशासन की सक्रियता से शव को पेड़ से उतारा गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतकासुहाना उर्फ झुमकी के पिता मो परवेज आलम ने अररिया (बैरगाछी) थाना कांड संख्या 1115/2022 दर्ज करवाया. दर्ज प्राथमिकी में दावा किया गया कि उसकी पुत्री को पति ने गला घोंटकर हत्या कर दी है और बाद में गालिब व उसके अन्य सहयोगियों ने मिलकर सुहाना उर्फ झुमकी के शव को पेड़ पर लटका दिया है.

इस मामले में कोर्ट में सभी गवाहों ने घटना का पूर्ण समर्थन किया. गवाहों के बयान से संतुष्ट होकर एडीजे 01 मनोज कुमार तिवारी ने आरोपित पति को दोषी पाया. सजा के बिंदु पर सरकार की ओर से एपीपी राजा नंद पासवान ने फांसी देने की अपील की, जबकि आसामी मो गालिब के अधिवक्ता कमलेश ठाकुर ने कम से कम सजा देने की गुहार लगायी. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सजा मुकर्रर की गयी.

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मृगेंद्रमणि सिंह

लेखक के बारे में

By मृगेंद्रमणि सिंह

मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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