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यूजीसी के माध्यम से प्रतिभावान छात्रों को प्रताड़ित करने का षडयंत्र

Updated at : 29 Jan 2026 8:39 PM (IST)
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यूजीसी के माध्यम से प्रतिभावान छात्रों को प्रताड़ित करने का षडयंत्र

हमेशा योग्यता को ही प्राथमिकता दिया जाना चाहिये

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अररिया. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नये नियमों पर हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक के लिये रोक लगा दिया है. बहरहाल इसे लेकर देश भर में विरोध का सिलसिला निरंतर जारी है. जिले में इसे लेकर विरोध के स्वर फूटने लगे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अजय झा ने कहा कि यूजीसी के इस कानून से देश की प्रतिभाओं को दबाने वाला है. इससे सामान्य वर्ग के बच्चों का शोषण बढ़ेगा. यह बच्चों को जाति-धर्म के आधार पर बांटने वाला है. हमारा देश हमेशा से समतामूलक समाज की अवधारणा पर टीका है. देश की सरकार इस कानून के माध्यम से इसे खंडित करने के प्रयासों में जुटा है. अन्य वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण वर्ग हमेशा भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया है. लेकिन सरकार लंबे रेस के घोड़े का पांव बांध कर लंगडे घोड़े पर सवार होकर रेस जीतना चाहती है. आरटीआइ एक्टिविस्ट प्रसन्नजीत कृष्ण ने कहा कि जाति उन्माद को कभी प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए. हमेशा योग्यता को ही प्राथमिकता दिया जाना चाहिये. चाहे वो किसी जाति व धर्म के लोग हों. जाति-धर्म की राजनीति से कभी देश का भला नहीं हो सकता है. कांग्रेस के पूर्व जिला प्रवक्ता शशिभूषण झा ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आयी है. तब से एक जाति को दूसरे से लड़ा कर अपना राजनीतिक लाभ उठाने के प्रयासों में लगी है. अब देश के लोगों को इस सच्चाई को जानने का समय आ गया है. उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यूजीसी के नये कानून को काला कानून बताया.

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MRIGENDRA MANI SINGH

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MRIGENDRA MANI SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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