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फारबिसगंज में तीन दशक बाद भाजपा को शिकस्त

Updated at : 15 Nov 2025 8:22 PM (IST)
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फारबिसगंज में तीन दशक बाद भाजपा को शिकस्त

कई सीटों पर बदला जनादेश

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अररिया. विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे की घोषणा के साथ ही जिले के कुछ विधानसभा सीटों का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गया. इस बार के चुनाव में कई सीटों पर अप्रत्याशित नतीजे सामने आये. जिसने न सिर्फ राजनीतिक दलों बल्कि मतदाताओं को भी आश्चर्यचकित किया. इसमें सबसे चौंकाने वाला परिणाम फारबिसगंज विधानसभा सीट का रहा. भाजपा का गढ़ माना जाने वाला यह सीट इस बार के चुनाव में भाजपा को गंवानी पड़ी. भाजपा की टिकट पर क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक रहे विद्यासागर केसरी उर्फ मंचन केसरी को चुनाव में कांग्रेस के मनोज विश्वास के हाथों महज 231 वोटों के अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी. फारबिसगंज विधानसभा सीट पर सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला. यह परिणाम इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 1990 के बाद पहली बार भाजपा को इस सीट पर हार मिली है. तीन दशक बाद बदला यह जनादेश स्थानीय राजनीति के बदलते समीकरण का संकेत देती है. जोकीहाट में फिर चमका एआइएमआइएम जोकीहाट विधानसभा सीट पर एआइएमआइएम ने लगातार दूसरी बार अपना कब्जा बरकरार रखा. पार्टी के उम्मीदवार मुर्शीद आलम यहां विजयी रहे. इस सीट का एक और बड़ा पहलू यह रहा कि पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिवंगत मो तसलीमुद्दीन के दोनों बेटे इस चुनाव में बुरी तरह हार गये. एआईएमआईएम के मुर्शीद आलम को चुनाव में कुल 83737 वोट प्राप्त हुए. दूसरे स्थान पर 54934 मत प्राप्त कर जदयू के मंजर आलम को संतोष करना पड़ा. वहीं जनसुराज से चुनाव लड़ रहे मो सरफराज आलम मो 35354 व शहनवाज आलम को 29659 वोट प्राप्त हुए. मो सरफराज आलम, जो चार बार जोकीहाट विधानसभा व एक बार अररिया लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, इस बार जनसुराज पार्टी से चुनाव लड़ते हुए तीसरे स्थान पर रहे. जबकि उनके छोटे भाई व 2020 में एआईएमआईएम की टिकट से जीत कर पहली बार विधायक बने शहनावज़ आलम इस बार चौथे स्थान पर रहे. रानीगंज में राजद की एंट्री, जदयू को बाहर का रास्ता रानीगंज विधानसभा सीट जिस पर वर्षों से भाजपा-जदयू गठबंधन का मजबूत गढ़ माना जाता था, इस बार सत्ता परिवर्तन की गवाही बनी. जदयू के मौजूदा विधायक अचमित ऋषिदेव को राजद के अविनाश मंगलम ने हराकर सीट पर कब्जा कर लिया. यह नतीजा जदयू के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है. जिले की दूसरी सीटों की बात करें तो भाजपा ने नरपतगंज व सिकटी में अपना वर्चस्व बरकरार रखा. वर्ष 2020 में भाजपा के पास तीन सीटें थीं. नरपतगंज, फारबिसगंज व सिकटी. लेकिन इस बार फारबिसगंज हाथ से निकल जाने से पार्टी को एक महत्वपूर्ण नुकसान उठाना पड़ा. जिले की प्रमुख सीट अररिया में कांग्रेस ने लगातार तीसरी बार फतह हासिल कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. यह जीत कांग्रेस के लिये उत्साहजनक रहा. कुल मिलाकर इस बार के नतीजे बताते हैं कि मतदाता अब परंपरागत राजनीति से हटकर नये समीकरण गढ़ रहे हैं. जिले की कई सीटों पर वोटरों ने संकेत दिया है कि विकास, स्थानीय मुद्दों व नये नेतृत्व की तलाश चुनावी निर्णयों को प्रभावित कर रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MRIGENDRA MANI SINGH

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