अररिया में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान तेज, स्कूलों में बच्चों के लिये जा रहे ब्लड सैंपल

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 16 May 2026 1:51 PM

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फाईलेरिया की जांच करती स्वास्थ्यकर्मी

Araria News : अररिया में फाइलेरिया यानी हाथीपांव बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है. सिकटी प्रखंड के चयनित स्कूलों में छोटे बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर संक्रमण की जांच की जा रही है.

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Araria News : अररिया के सिकटी से संजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट. सिकटी प्रखंड में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) अभियान शुरू किया है. इसके तहत चयनित विद्यालयों में कक्षा एक और दो के बच्चों के ब्लड सैंपल लिये जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीम आधुनिक क्यूएफएटी किट के माध्यम से बच्चों में फाइलेरिया संक्रमण की जांच कर रही है.

सीएचसी सिकटी से अभियान की शुरुआत

इस विशेष अभियान का शुभारंभ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकटी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजमत राणा और स्वास्थ्य प्रबंधक अनुप कुमार ने संयुक्त रूप से किया. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों को चयनित 24 विद्यालयों के लिए रवाना किया गया.

800 बच्चों की जांच का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस सर्वे में करीब 800 बच्चों को शामिल किया गया है. अब तक सिकटी क्षेत्र के पांच चयनित विद्यालयों में 198 बच्चों के ब्लड सैंपल की जांच की जा चुकी है. जांच के दौरान बच्चों में फाइलेरिया के परजीवी की मौजूदगी का पता लगाया जा रहा है.

आधुनिक क्यूएफएटी किट से हो रही जांच

स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए राज्य मुख्यालय से आधुनिक क्यूएफएटी किट मंगवायी है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार स्कूलों का चयन सॉफ्टवेयर के माध्यम से रैंडम तरीके से किया गया है. बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालयों की सूची प्राप्त करने के बाद चयन प्रक्रिया पूरी की गयी.

संक्रमण की स्थिति का होगा वैज्ञानिक आकलन

संदीप कुमार ने बताया कि कक्षा 1 और 2 के बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर संक्रमण की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सर्वे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों में फाइलेरिया संक्रमण का स्तर एक प्रतिशत से कम रहे.

फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर विभाग गंभीर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह सर्वे फाइलेरिया के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा. अधिकारियों ने कहा कि समय पर जांच और जागरूकता के माध्यम से हाथीपांव जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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