अररिया के भरगामा की जलवायु में लहलहा रही शिमला मिर्च की खेती, किसानों को दिख रहा लाखों का मुनाफा

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खेतों में लगे शिमला मिर्च के पौधे

Araria News: अररिया के भरगामा में अब किसान सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं. यहां के खेतों में शिमला मिर्च की खेती नई उम्मीद बनकर उभर रही है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी की राह दिख रही है.

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Araria News: भरगामा अररिया से राष्ट्र भूषण पिंटू की रिपोर्ट . अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में शिमला मिर्च की खेती धीरे-धीरे किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. रघुनाथपुर पंचायत के शेखपुरा गांव में बड़े पैमाने पर की जा रही यह खेती अब इलाके में नकदी फसल के रूप में पहचान बना रही है. किसानों का कहना है कि भरगामा की मिट्टी और जलवायु शिमला मिर्च की खेती के लिए काफी उपयुक्त है, जिससे अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा मिल रहा है.

पारंपरिक खेती छोड़ नकदी फसल की ओर बढ़ रहे किसान

शेखपुरा गांव के किसान अब धान-गेहूं जैसी पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि शिमला मिर्च की बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, खासकर शादी-विवाह के मौसम में इसकी कीमत और अधिक बढ़ जाती है. यही वजह है कि अब कई किसान इस खेती को लाभदायक विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.

दोमट मिट्टी और ऊंची जमीन पर मिल रही बेहतर पैदावार

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार शिमला मिर्च की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली ऊंची जमीन जरूरी होती है. भरगामा क्षेत्र में ऐसी भूमि पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. किसानों ने बताया कि अक्टूबर महीने में बीजारोपण किया जाता है और लगभग तीन महीने बाद पौधों में फल आना शुरू हो जाता है. यहां इस्तेमाल होने वाले बीज चेन्नई से मंगाये जाते हैं.

लागत अधिक लेकिन मुनाफा भी शानदार

प्रगतिशील किसान गुड्डु यादव ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ जमीन में शिमला मिर्च की खेती की है, जिसमें करीब चार लाख रुपये की लागत आयी है. उनका कहना है कि बाजार भाव में उतार-चढ़ाव बना रहता है, लेकिन अनुमान के मुताबिक छह से आठ लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है.

कई बाजारों में हो रही सप्लाई

भरगामा में तैयार होने वाली शिमला मिर्च की सप्लाई फारबिसगंज, गुलाब बाग, जोगबनी और सिंहेश्वर के बाजारों में की जा रही है. किसानों के अनुसार अच्छी गुणवत्ता होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

कृषि विभाग भी कर रहा मदद

प्रखंड प्रभारी कृषि पदाधिकारी आलोक प्रकाश ने बताया कि भरगामा की जलवायु शिमला मिर्च की खेती के लिए अनुकूल है. कृषि विभाग और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करा रहे हैं.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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