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आचार्य तुलसी विकास पुरुष थे: मुनि श्री आनंद कुमार जी

Updated at : 15 Sep 2024 6:09 PM (IST)
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आचार्य तुलसी विकास पुरुष थे: मुनि श्री आनंद कुमार जी

महोत्वस में काफी संख्या में मौजूद थे श्रद्धालु

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फोटो-1-मंच पर मौजूद मनि श्री आनंद कुमार. प्रतिनिधि, अररिया मानव धर्म के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी आचार्य श्री तुलसी का 31वां पट्टोत्सव सह विकास महोत्सव के रूप में अररिया तेरापंथ भवन में मनाया गया. तेरापंथ भवन अररिया में मुनि आनंद कुमार जी कालू व सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी विराज रहे हैं. तेरापंथ भवन में मुनि श्री का कार्यक्रम प्रातः 05 बजे प्रातः मंगल पाठ तथा प्रातः 8:30 से 9:30 तक व्याख्यान होता है. तत्पश्चात दोपहर 02 बजे से 04 बजे तक सेवा होती है. संध्या 08 बजे से 09 बजे तक प्रवचन होता है. मुनि श्री के सानिध्य में नित नये व रोचक प्रेरणादायक धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं. कार्यक्रम में आचार्य तुलसी का पट्टोत्सव का कार्यक्रम मनाया गया. कार्यक्रम में मुनिश्री ने आचार्य तुलसी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में बीसवीं शताब्दी का एक ज्योतिर्मय नक्षत्र विश्व क्षितिज पर उभरने वाला एक महामानव जिसने अपनी पहचान नैतिक व आध्यात्मिक क्रांति के द्वारा ना केवल जैन समाज बल्कि पूरे विश्व में ओजस्विता व वर्चस्वीता के साथ धर्म क्रांति के द्वारा किया. इंसान को इंसानियत के पथ पर बढ़ने के लिए अनुव्रत प्रेक्षा ध्यान व जीवन विज्ञान जैसे सर्वभोम दिये उस महामानव का नाम था अनुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी. आचार्य तुलसी जैन धर्म तेरापंथ धर्मसंघ के नवम अधिसास्ता हुए. गुरुदेव श्री तुलसी जिनका जन्म 20 अक्तूबर 1914 को राजस्थान प्रांत के लाडनूं शहर में प्रतिष्ठित ओसवाल खटेड वंश में माता वंदना की कुक्षी से हुआ. ——————- धूमधाम से मनाया श्री-श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का जन्मोत्सव फोटो-2-कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुगण. प्रतिनिधि, फारबिसगंज परमप्रेममय श्री-श्री ठाकुर के स्थित मंदिर सह सत्संग केंद्र फारबिसगंज में श्री-श्री ठाकुरजी अनुकूल चंद्र जी का शुभ 137वां जन्मदिवस रविवार को धूमधाम से मनाया गया. कार्यक्रम में सैकड़ों सत्संगियों ने भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना से हुई. उसके बाद विभिन्न धर्मग्रंथों के पाठ के पश्चात सत्संग व नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया. जिसमें कौशल भगत , भानुदा, पूजा देवी ए एक से एक भजन प्रस्तुत किये गये. जिसे सुन दर्शक मंत्रमुग्ध हो गये. समीरदा ने अपने वक्तव्य में ठाकुर जी की बाल्य लीलाओं का वर्णन किया. उन्होंने बताया की ठाकुर जी इस कलियुग में लोगों के दुःख दूर कर उन्हें प्रेम का संदेस देने अवतार ग्रहण किये हैं. जो खुद के आचरण द्वारा सबों को सतपथ पर चलने का मार्ग दिखातें हैं. वे ही सद्गुरु होतें हैं इसलिए हमें हमेशा सत्य पथ पर चलना चाहिए. कार्यक्रम को लेकर पूरे मंदिर परिसर को फूल मालाओं व आलोक मालाओं से सजाया गया था. जो सबों के आकर्षण का केंद्र था. मौके पर मुख्य पार्षद वीणा देवी, उप मुख्य पार्षद प्रतिनिधि बुलबुल यादव, समीर कुमार दे, विजयकांत झा,ब्रजेन्द्र नारायण सिंह, हीरालाल दास, वीरेंद्र मंडल ,राजाराम राय, पुनीत अग्रवाल,वैद्यनाथ रॉय,विजय भगत सहित सैंकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे.

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