अररिया में जोगबनी का शनि मंदिर बना आस्था का बड़ा केंद्र, शनिवार को उमड़ती है भक्तों की भीड़

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Aaj ka Darsan : नेपाल सीमा के पास स्थित जोगबनी का यह शनि मंदिर अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. हर शनिवार यहां पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
Aaj ka Darsan : अररिया से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट. शनि मंदिर इंद्रनगर जोगबनी आज सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी खास पहचान बना चुका है. वर्ष 2012 में स्थापित यह मंदिर जोगबनी के इंद्रनगर इलाके में स्थित है, जहां हर दिन श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
खासकर शनिवार को यहां विशेष पूजा और शनि देव की आराधना के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.
शनिवार को भक्तिमय हो जाता है पूरा मंदिर परिसर
इंद्रनगर रोड स्थित यह मंदिर शनिवार को सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बन जाता है. सुबह से ही श्रद्धालु तेल, फूल और प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचने लगते हैं. मंदिर परिसर में शनि देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां वर्षों से शनि पूजा की परंपरा चली आ रही है. यही वजह है कि जोगबनी ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और नेपाल सीमा से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
वार्षिक उत्सव में दिखता है भव्य धार्मिक नजारा
शनि मंदिर में हर साल स्थापना दिवस के अवसर पर पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जाता है. इस दौरान भव्य कलश यात्रा, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन होता है. वर्ष 2023 से यहां बड़े स्तर पर शोभायात्रा निकाली जाने लगी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
शाम के समय मंदिर परिसर दीपों और रोशनी से जगमगा उठता है. धार्मिक माहौल और भक्तिमय संगीत श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
शनि मंदिर के साथ हनुमान मंदिर भी आकर्षण का केंद्र
हनुमान मंदिर इंद्रनगर भी इसी परिसर में स्थित है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं. नेपाल सीमा के नजदीक स्थित होने के कारण यह इलाका धार्मिक पर्यटन के रूप में भी तेजी से पहचान बना रहा है.
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शनि देव की कृपा हमेशा बनी रहती है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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