बासगीत परचा के लिए भटक रहे महादलित परिवार
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बंदोबस्ती की गुहार लिये तीन साल से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रहे बिहार सरकार के बंदोबस्ती की जमीन पर भू माफियाओं द्वारा जबरन किया जा रहा कब्जा जमीन पर बसे पचास महादलित परिवारों में महज छह के नाम ही जारी है बासगीत परचा कहीं इंसाफ नहीं मिलता देख मामला पहुंचा जिला जन लोक शिकायत […]
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बंदोबस्ती की गुहार लिये तीन साल से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रहे
बिहार सरकार के बंदोबस्ती की जमीन पर भू माफियाओं द्वारा जबरन किया जा रहा कब्जा
जमीन पर बसे पचास महादलित परिवारों में महज छह के नाम ही जारी है बासगीत परचा
कहीं इंसाफ नहीं मिलता देख मामला पहुंचा जिला जन लोक शिकायत कार्यालय
अररिया : दियारी पंचायत के मजगामा में बिहार सरकार के बंदोबस्ती जमीन पर तीस साल से बसे करीब तीन दर्जन से अधिक महादलित परिवारों के समक्ष विस्थापन की समस्या दिन ब दिन गहराती जा रही है. कहा जाता है कि गांव के दबंग सरकारी जमीन पर जबरन मिट्टी भराई कर इसे औने-पौने दाम पर बेचने में लगे हैं, जबकि महादलित परिवार के सदस्य बंदोबस्ती के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं. यही नहीं बल्कि छह महादलित परिवारों के नाम बंदोबस्त जमीन पर भी दबंग कब्जा करने की फिराक में लगे हैं. परेशान पीड़ितों ने 23 जून को जिला जन लोक शिकायत कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है. बताया जाता है कि मामले की सुनवाई भी आरंभ हो चुकी है.
बासगीत परचा से वंचित परिवारों ने स्थायी तौर पर जमीन पर अपने मालिकाना हक के लिए 27 सितंबर 2013 को डीएम के जनता दरबार में आवेदन देकर मदद की गुहार लगायी थी. इसे 29 सितंबर को जिला जन शिकायत कोषांग भेज दिया गया. कोषांग ने दिनांक 24 नवंबर 2013 को पत्रांक 2072 के जरिये अंचल कार्यालय को नोटिस भेजा. तब से आज तक मामला अंचल कार्यालय के दफ्तर में धूल फांक रहा है.
इधर गांव के कुछ दबंग जमीन पर जबरन कब्जा के फिराक में लगे हैं. पीड़ितों की मानें तो दबंग जमीन पर मिट्टी भराई कर उसे औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं. पीड़ितों ने बताया कि विरोध करने पर दबंग उनके परिवार के साथ मारपीट करते हैं. जमीन खाली नहीं करने पर झोपड़ी में आग लगा देने और जान से मारने की धमकी तक देते हैं.
मामले में न्याय नहीं मिलता देख पीड़ित परिवारों ने मदद के लिए 23 जून को जिला जन लोक शिकायत कार्यालय में आवेदन दिया है. आवेदन देने वालों में बनारसी ऋषिदेव, कार्तिक ऋषिदेव, फूलचंद ऋषिदेव,फूलचंद ऋषि, संगीता देवी, नारद ऋषिदेव सहित करीब दो दर्जन पीड़ित परिवार के सदस्य शामिल हैं. बताया जाता है कि 12 जुलाई को मामले की पहली सुनवाई भी हो चुकी है, लेकिन मामले में किसी निर्णय तक फिलहाल नहीं पहुंचा जा सका है.
तीस सालों से रह रहे हैं जमीन पर, किया जा रहा बेदखल
जानकारी मुताबिक दियारी पंचायत के मजगामा में बंदोबस्ती के खाता संख्या 469 खेसरा 87 पर महादलित समुदाय के तीन दर्जन से अधिक परिवार तीस सालों झोपड़ी बना कर रह रहे हैं. कुल दो एकड़ 55 डिसमिल जमीन पर उनका दखल व कब्जा है.ये लोग जमीन पर छोटी-छोटी झोपड़ी बना कर लंबे समय से मजदूरी कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते आ रहे हैं. खास बात ये कि उक्त खाता,
खेसरा से महादलित समुदाय के महज छह लोगों के नाम ही अब तक बासगीत परचा जारी किया जा सका है, जबकि वहां बसे महादलित परिवारों की संख्या तीन दर्जन के करीब है.
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