जान जोखिम में डाल कर नाव पर यात्रा करते हैं ग्रामीण

Updated at : 12 Sep 2019 7:02 AM (IST)
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जान जोखिम में डाल कर नाव पर यात्रा करते हैं ग्रामीण

अररिया : अररिया फारबिसगंज के पिपरा पंचायत से होकर गुजरने वाली परमान नदी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश हैं पिपरा के निवासी. यहां के लोग अब भी परमान नदी को पार करने के लिए नाव का ही सहारा लेते हैं. अत्यंत कष्टदायी व भय के साये में यात्री नाव के […]

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अररिया : अररिया फारबिसगंज के पिपरा पंचायत से होकर गुजरने वाली परमान नदी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को विवश हैं पिपरा के निवासी. यहां के लोग अब भी परमान नदी को पार करने के लिए नाव का ही सहारा लेते हैं. अत्यंत कष्टदायी व भय के साये में यात्री नाव के सहारे अपने-अपने घरों से रोज आते व जाते हैं.

इस विवशता से प्रतिदिन फारबिसगंज प्रखंड के पिपरा, कुशमाहा, नेपाल, बिशनपुर, कुलवाह, मटियारी, सुंदरी मंठ आदि गांवों के लोग दो-चार होते हैं. इस विषय पर न तो पदाधिकारी और न ही जन प्रतिनिधि की नजरें ही जा रही हैं. जबकि मंगलवार को मुहर्रम का मेला देख कर लौट रहे फारबिसगंज के पिपरा स्थित परमान नदी में मंगलवार की शाम नाव के डूबने से चार दर्जन लोग चोटिल हो गये थे.
जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बचाया गया. पानी का बहाव काफी तेज था. ग्रामीणों के मदद से सभी बच्चे-बूढ़े महिला को बचा तो लिया गया. लेकिन कई लोगों का साइकिल व मोबाइल पानी में डूब गया. सभी लोग पिपरा बोरिंग स्थित मुहर्रम मेला देख कर लौट रहे थे.
20-25 लोगों की क्षमता वाली नाव पर करीब 45 से 50 लोग सवार हो गये थे. नाव पर साइकिल, बाइक व खाने-पीने की चीजों को ग्रामीण शहर से गांव लेकर लौठ रहे थे. अत्यधिक भार होने के कारण अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया व नदी की धारा में बह गया.
शुक्र की बात यह थी कि मौके पर मौजूद करीब एक दर्जन लोगों ने नदी में छलांग लगाकर सभी को डूबने से बचा लिया. घटना के बाद लोग अब भी नाव पर सवारी तो कर रहे हैं लेकिन पिपराघाट पर नदी पार करने वालों में दहशत कायम है. बावजूद जान जोखिम में डालकर लोग नाव पर सवार हो नदी पार करने के लिए विवश हैं.
स्थानीय लोगों में मुखिया दीपचंद साह, समाजसेवी चंदन कुमार साह, नरेश कुमार मंडल के अनुसार जब यह हादसा हुआ तो प्रशासन को सूचना दी गयी. बावजूद प्रशासन के लोग नहीं पहुंचे. सभी अधिकारी मुहर्रम के जुलूस को संतुलित करने में ही लगे हुए थे.
उनके अनुसार 20-25 हजार के आबादी के आवागमन का एक मात्र सहारा नाव ही है. अभी तो हालत सामान्य है. जब बाढ़ के हालात होते हैं तो सफर करना जान में जोखिम में डालने वाला होता है. ऐसे में लंबी दूरी कर फारबिसगंज प्रखंड कार्यालय पहुंचना पड़ता है.
पुल निर्माण करने की बात जनप्रतिनिधियों के द्वारा किया तो गया है लेकिन अब तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है. ऐसे में जान जोखिम में डाल कर यात्रा करना विवश हैं.
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