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दूसरे जिले के लोगों की जान बचाने के काम आ रहा अररिया वासियों का रक्त

Updated at : 14 Jun 2019 7:50 AM (IST)
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दूसरे जिले के लोगों की जान बचाने के काम आ रहा अररिया वासियों का रक्त

हेमंत कुमार हीरा, अररिया : अररिया वासियों का खून दूसरे जिला के लोगों के जान बचाने के काम आ रहा है. जिले वासियों को खून की जरूरत पड़ने पर उसे किसी ग्रुप का खून देकर एक्सचेंज कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए कि जिला बनने के तीस साल बाद भी यहां ब्लड बैंक की स्थापना […]

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हेमंत कुमार हीरा, अररिया : अररिया वासियों का खून दूसरे जिला के लोगों के जान बचाने के काम आ रहा है. जिले वासियों को खून की जरूरत पड़ने पर उसे किसी ग्रुप का खून देकर एक्सचेंज कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए कि जिला बनने के तीस साल बाद भी यहां ब्लड बैंक की स्थापना नहीं हो सकी है. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि ब्लड बैंक जिले में जल्द बन कर तैयार हो जायेगा.

गौरतलब है कि जिले में सदर अस्पताल व अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज में ही ब्लड स्टोरेज का इंतजाम है. जिले में लगने वाले ब्लड डोनेशन कैंप में जमा खून को पूर्णिया, सिलीगुड़ी व नेपाल स्थित ब्लड बैंक भेजा जाता है. इस कारण अररिया जिले के लोगों का ब्लड दूसरे जिले के लोगों की जान बचाने के भी काम आ रहा है.
अररिया में जल्द होगा ब्लड बैंक की स्थापना . स्वास्थ विभाग से मिली जानकार अनुसार जल्द ही जिले में ब्लड बैंक की स्थापना होने वाला है. इसे लेकर जरूरी तैयारी पूरी कर ली गयी है. जिम्मेदार संस्था को इसका काम सौंपा जा चुका है.
जानकारी अनुसार सदर अस्पताल स्थित ब्लड स्टोरेज सेंटर को ब्लड बैंक के रूप में विकसित किया जाना है. ब्लड बैंक के लिए जरूरत तकनीकी संसाधन की खरीदारी हो चुकी है. ब्लड बैंक स्थापित हो जाने के बाद जरूरत मंद लोगों को यहां आसानी से ब्लड की उपलब्ध कराया जा सकेगा.
क्यों जरूरी है रक्तदान . ब्लड डोनेट कर आप किसी अजनबी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. ब्लड को किसी भी उत्पादित नहीं किया जा सकता है. इसका कोई विकल्प भी मौजूद नहीं है. हमारे शरीर में कुल वजन का 7 प्रतिशत हिस्सा खून का होता है.
आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है. ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाते हैं. इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है. ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है. इसमें जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर में स्वत: बन जाता है. शरीर में ब्लड वॉल्यूम 24 से 72 घंटे में ही बन जाता है.
ब्लड डोनेट करना सेहत के लिए लाभकारी . चिकित्सकों के मुताबिक ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है. डोनेशन से खून पतला होता है. जो कि हृदय के लिए अच्छा माना जाता है. चिकित्सक की मानें तो नये रिसर्च में यह बात जाहिर हो चुका है कि नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है. क्योंकि इससे शरीर में मौजूद विषैला पदार्थ बाहर निकल आता है.
ब्लड डोनेट करने से पहले होता है जांच . ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है. ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है. इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है. बताया जाता है कि ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है.
18 साल से अधिक उम्र वाले लोग कर सकते हैं रक्तदान . अठारह साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष जिनका वजन 50 किलो या इससे अधिक है. एक साल में तीन से चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं. माना जाता है कि ब्लड डोनेट करने में सक्षम महज तीन प्रतिशत लोग भी साल में तीन बार अपना ब्लड डोनेट करते हैं तो देश में ब्लड के कमी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जायेगी. ऐसा होने पर असमय मौत के कई मामलों को रोका जा सकता है.
ब्लड डोनेट करने से पहले व इसके कुछ घंटे बाद तक धुम्रपान से लोगों को परहेज करना चाहिए. ब्लड डोनेट करने वाले व्यक्ति को 24 से 48 घंटे पहले शराब सहित अन्य नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए. ब्लड डोनेट करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना जरूरी है. ब्लड डोनेट करने के बाद आप पहले की तरह ही अपने सभी कामकाज निपटा सकते हैं.
प्रसव के दौरान होने वाली मौत के मामलों में आयेगी कमी: सीएस
अररिया सदर अस्पताल परिसर में जल्द ही ब्लड बैंक की स्थापना हो जायेगी. इसके बाद यहां के लोगों को ब्लड के कमी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. जिलेवासियों द्वारा किया गया रक्तदान को जरूरत मंदों की मदद के लिए यहां सुरक्षित रखा जा सकेगा. प्रसव के दौरान अधिकांश महिलाओं को ब्लड की जरूरत होती है. लिहाजा ब्लड बैंक की स्थापित होने के बाद प्रसव के दौरान होने वाली मौत की संख्या को कम करने में मदद मिलेगा.
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