मानव शृंखला के सुरक्षा घेरे में निकला शांतिपूर्ण जुलूस

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अररिया : इमारते शरिया, बिहार के आह्वान, जमीयते उलेमा व जमाते इसलामी सहित विभिन्न मुस्लिम धार्मिक संगठनों के सहयोग से सोमवार को शहर में मौन जुलूस निकाल कर मुस्लिम महिलाओं ने केंद्र सरकार के तीन तलाक बिल का पुरजोर विरोध किया. जुलूस में शहर के अलावा आसपास के गांव की हजारों की संख्या में मुस्लिम […]

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अररिया : इमारते शरिया, बिहार के आह्वान, जमीयते उलेमा व जमाते इसलामी सहित विभिन्न मुस्लिम धार्मिक संगठनों के सहयोग से सोमवार को शहर में मौन जुलूस निकाल कर मुस्लिम महिलाओं ने केंद्र सरकार के तीन तलाक बिल का पुरजोर विरोध किया. जुलूस में शहर के अलावा आसपास के गांव की हजारों की संख्या में मुस्लिम महिलाएं शरीक हुई.

खास ये कि इस जन सैलाब को व्यवस्थित करने व महिलाओं की सुरक्षा के लिए सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सक्रिय दिखे. पूरा जुलूस स्वयंसेवकों द्वारा जुलूस मार्ग पर बनाये गये मानव शृंखला के घेरे में रहा. समाहरणालय पहुंचने के बाद पूर्व जिप अध्यक्ष शगुफ्ता अजीम के नेतृत्व में महिलाओं के एक शिष्टमंडल ने डीएम को ज्ञापन सौंपा

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक तीन तलाक बिल के विरोध में मौन प्रदर्शन के लिए महिलाएं सबसे पहले आजाद एकेडमी परिसर में इकट्ठा हुईं. तमाम व्यवस्था के बाद वहीं से जुलूस निकला. जुलूस में शामिल महिलाओं की सुरक्षा व विधि व्यवस्था बनाये रखनेके लिए जुलूस मार्ग पर मुस्लिम समुदाय के युवाओं व विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सड़क के दोनों तरफ मानव शृंखला बना रखी थी. उसी शृंखला के बीच अपने हाथों में तिरंगा थामे हजारों की संख्या में महिलाएं चांदनी चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचीं.
देखते ही देखते पूरा परिसर मुस्लिम महिलाओं से भर गया. वहीं महिलाओं के एक शिष्टमंडल ने डीएम के कार्यालय कक्ष में उसने भेंट कर ज्ञापन सौंपा. शिष्टमंडल में पूर्व जिप सदस्य शगुफता अजीम के अलावा तसनीम कौसर, शादमां फिरदौस, फातिमा परवीन, नाजनीन इरशाद व शादां जर्रीं के अलावा नगर पार्षद मरजान कौसर, फरीदा खातून, मुशर्रफ जहां आदि भी शामिल थीं.
लोक सभा में पारित तीन तलाक बिल का विरोध करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे किसी बिल की जरूरत नहीं थी. केंद्र सरकार द्वारा लोक सभा में पास कराया बिल न केवल भारत के संविधान के विरुद्ध है. बल्कि ये महिला व बच्चों के हित के विरोध में है. ज्ञापन में कहा गया है कि बिल असामाजिक है.
मुस्लिम महिलाएं बिल का विरोध करते हुए बिल को वापस लेने की मांग करती हैं. ज्ञापन में बीते दिनों संसद में दिये गये राष्ट्रपति के अभिभाषण के उस हिस्से पर भी नाराजगी जतायी गयी है जिस में उन्होंने बिल को मुस्लिम महिलाओं को सम्मान देने वाला बताया था. मांग की गयी है कि अभिभाषण से उस हिस्से को सरकार निकाल दे.
मिली जानकारी के अनुसार कार्यक्रम को सफल बनाने में इमारते शरिया के काजी अतीकुल्लाह रहमानी, मुफ्ती सोहराब नदवी, जमाते इसलामी के मो मोहसिन, जमीयते उलेमा के हाजी अब्दुल गफ्फार व डा आबिद हुसैन, कारी नियाज अहमद कासमी, मुफ्ती इनामुल बारी व अन्य धार्मिक विद्वानों के अलावा जिला क्रीड़ा संघ के सचिव मासूम रेजा, पूर्व नगर पार्षद कमाले हक, व्यवसायी शाह मो एकराम, जकीउल होदा, गुड्डू खान, एकरामुद्दीन उर्फ मद्दन, नगर पार्षद प्रतिनिधि मो इबरार आलम, मो हैदर, अजहरूल हक सहित अन्य दर्जनों लोग शामिल रहे.
मुस्लिम महिलाओं की मांगें
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नहीं थी किसी बिल की जरूरत
मुस्लिम धार्मिक विद्वानों से बिना विचार विमर्श के लाया बिल
बिल का मसविदा भारतीय संविधान के विरुद्ध है
मुस्लिम महिला व बच्चों के हित के विरोध में है बिल
मुस्लिम महिलाएं बिल को खारिज करती है, वापस लिया जाये बिल
मौन जुलूस के दौरान दिखा अनुशासन,बनी रही खामोशी
सिलिंडर फटा, एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलसा
27 करोड़ की राशि दबाये बैठे हैं ऋण धारक व दूसरे बकायेदार
बकायेदारों के आंकड़े
कुल निर्गत डीडब्लू वारंट- 379
कुल बकाया राशि- 26 करोड़, 84 लाख, 82 हजार 128
थाना वारंट संख्या
जोगबनी 75
अररिया 87
पलासी 49
फारबिसगंज 12
सिकटी 08
जोकीहाट 21
नरपतगंज 12
मदनपुर 03
भरगामा 02
बैरगाछी 33
ताराबाड़ी 30
कुर्साकांटा 09
रानीगंज 08
अररिया आरएस 09
बौंसी बसैटी 11
सिमराहा 04
महलगांव 06
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