अररिया सबसे अधिक कुपोषित जिला
दुखद. पांच से 18 साल के पांच लाख 54 हजार किशोर कुपोषण के शिकार जिले में व्याप्त गरीबी की तस्वीर एक बार फिर से आंकड़ों की जुबानी सामने आयी है. आंकड़े बता रहे हैं कि जिले के भावी भविष्य को संरक्षित व सुरक्षित रख पाने के मामले में हम कितने लापरवाह बने हुए हैं. देश […]
दुखद. पांच से 18 साल के पांच लाख 54 हजार किशोर कुपोषण के शिकार
जिले में व्याप्त गरीबी की तस्वीर एक बार फिर से आंकड़ों की जुबानी सामने आयी है. आंकड़े बता रहे हैं कि जिले के भावी भविष्य को संरक्षित व सुरक्षित रख पाने के मामले में हम कितने लापरवाह बने हुए हैं. देश में कुपोषण के ताजा हालात को लेकर जारी रिपोर्ट में देश के सौ अतिकुपोषित जिलों की सूची में अररिया का स्थान पहला है. कुपोषण के मामले में राज्य के अन्य जिलों की तुलना में भी अररिया पहले स्थान पर है.
पांच से अठारह साल के 57.8 प्रतिशत किशोर कुपोषित
अररिया : महापंजीयक व जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा पांच से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर किये गये सर्वेक्षण के आधार पर जारी रिपोर्ट में देश के अति कुपोषित एक सौ जिलों में बिहार के 17 जिलों को शामिल किया गया है. देश भर में सबसे अधिक कुपोषण के शिकार बच्चे व किशोर अररिया के हैं. इसका प्रतिशत 57.8 है.
एक अनुमान के मुताबिक जिले के तीन में से दो बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं. जिले की वर्तमान जनसंख्या 32 लाख के करीब है. इसमें पांच से 18 साल आयु वर्ग के किशोरों की संख्या लगभग नौ लाख 60 हजार बतायी जाती है. आंकड़ों के लिहाज से पांच लाख 54 हजार 880 किशोर कुपोषण जैसे गंभीर बीमारी की चपेट में हैं. गौरतलब है कि पांच से अठारह साल की आयु किसी किशोर के भविष्य निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण है. जिले के भावी भविष्य के निर्धारण की जिम्मेदारी भी इसी आयु वर्ग के किशोरों पर है. जारी रिपोर्ट अपने भविष्य को संरक्षित रख पाने में हमारी नाकामी को बखूबी बयां करता है.
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