जिले में नकली बीज कारोबारियों पर नहीं है नियंत्रण

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नेपाल से सटे इलाके नकली खाद कारोबार के लिए हमेशा रहा है चर्चित नकली खाद-बीज के कारण हर साल सैकड़ों किसानों की फसल हो जाती है बर्बाद अररिया : नरपतगंज प्रखंड में रविवार को जिस तरह से नकली खाद-बीज के कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. इससे जिले के किसानों की हिमायत के लिए किये […]

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नेपाल से सटे इलाके नकली खाद कारोबार के लिए हमेशा रहा है चर्चित

नकली खाद-बीज के कारण हर साल सैकड़ों किसानों की फसल हो जाती है बर्बाद
अररिया : नरपतगंज प्रखंड में रविवार को जिस तरह से नकली खाद-बीज के कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. इससे जिले के किसानों की हिमायत के लिए किये जाने वाले प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं. जिले की आधी आबादी अपने जीविकोपार्जन के लिए पूरी तरह कृषि पर आश्रित हैं. कृषि से प्राप्त होने वाली आय ही जिले की अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करता है. इसके बाद विभागीय योजनाओं में होने वाली लूट व क्षेत्र में फल-फूल रहे नकली खाद बीज के कारोबार पर प्रशासन को कोई नियंत्रण नहीं दिखता. इन वजहों के कृषकों का मनोबल लगातार प्रभावित हो रहा है. दरअसल जिले में नकली खाद-बीज का बड़ा कारोबार है. नेपाल से सटे सीमावर्ती इलाकों में नकली खाद-बीज निर्माण और बिक्री का बड़ा नेटवर्क हमेशा से सक्रिय रहा है.
इस पर नकेल कसने के प्रशासनिक प्रयासों के अभाव में हर साल जिले के लाखों किसानों को अपने मेहनत व पूंजी से लगायी गयी फसल के बर्बाद होने का संकट बना रहता है.
हमेशा से बदनाम रहे हैं नेपाल से सटे सीमावर्ती इलाके : नकली खाद के कारोबार के लिए नेपाल से सटे इलाके हमेशा से बदनाम रहे हैं. भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित फारबिसगंज, जोगबनी शहर हो या नरपतगंज व सिकटी प्रखंड के नेपाल से सटे इलाके नकली खाद कारोबार के लिए हमेशा चर्चित रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों में खाद-बीज दुकान का लाइसेंस निर्गत करने में कृषि विभाग का रवैया भी उदारतापूर्ण रहा है.
जिले में खाद बीज के कुल 615 थोक व खुदरा लाइसेंसी दुकानें हैं.
इसमें अकेले फारबिसगंज प्रखंड में खुदरा खाद दुकानों की संख्या 126 व थोक दुकानदारों की संख्या 13 है. इसके अलावा नरपतगंज प्रखंड में खाद बीज के 81 लाइसेंसी दुकानें हैं. तो सिकटी प्रखंड में कुल दुकानों की संख्या 46 है. सीमा से सटे नरपतगंज के इलाके फुलकाहा, घुर्णा, बसमतिया, भोड़हर, बबुआन के अलावा सिकटी प्रखंड के मजरख, पहाडा, सैदाबाद, लेटी भुलानी व अन्य इलाके ऐसे हैं. जहां नकली खाद बीज बनाने के संगीन मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं.
फारबिसगंज मुख्य बाजार से सटे इलाके ही नकली खाद व्यवसाय के लिए हमेशा चर्चा में रहा है. एक से अधिक बार ऐसे मामलों के उजागर होने के बाद भी नकली खाद व्यवसाय पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रशासनिक प्रयास अब तक सिफर रहा है. इसका खामियाजा यहां के किसानों को उठाना पड़ रहा है.
कृषि विभाग कारोबार पर नियंत्रण को है जिम्मेदार
नकली खाद-बीज के कारोबार पर नकेल कसने की पूरी जिम्मेदारी जिला कृषि विभाग की है. विभागीय प्रावधानों के मुताबिक कृषि विभाग डीएओ की अगुआई में छापामारी दल का गठन कर दुकानों में बेचे जा रहे खाद-बीज की निगरानी व निरीक्षण के लिए जिम्मेदार हैं. बेचे जा रहे खाद बीज के क्वालिटी पर संदेह होने पर इसका नमूना प्राप्त कर लैब में जांच का प्रावधान है. जांच में कर्मी पाये जाने पर दुकान का लाइसेंस रद्द करते हुए दोषी दुकानदार पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह कृषि विभाग की है. गौरतलब है कि नकली खाद बीज के किसी दुकान पर विभागीय कार्रवाई का कोई मामला कभी सामने नहीं आता. बीते साल नरपतगंज व फारबिसगंज प्रखंड में किसानों की शिकायत पर स्थानीय पुलिस प्रशासन की सक्रियता के कारण नकली खाद के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ. बीते रविवार को नरपतगंज प्रखंड के फुलकाहा मानिकपुर में बनाये जा रहे नकली खाद बीज के बड़े रैकेट के उद्भेन में स्थानीय पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रही. जो जिला कृषि विभाग के नकली खाद-बीज के व्यवसाय की निगरानी व निरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं.
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