मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में भर्ती तीन बच्चों में एइएस की हुई पुष्टि, चमकी बुखार के दो मरीज भर्ती

मुजफ्फरपुर में एइएस से बचाव के लिए कुपोषित बच्चों की खोज की जायेगी. आशा आंगनबाड़ी सेविका के साथ स्वास्थ्य मानक से कम वजन वाले नवजात की सूची तैयार करेंगी. उन्हें बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुनर्वास केंद्र रेफर किया जायेगा.
मुजफ्फरपुर. एसकेएमसीएच के पीआइसीयू वार्ड में भर्ती तीन बच्चों में एइएस की पुष्टि हुई है. जबकि, चमकी-बुखार की शिकायत पर दो बच्चे भर्ती हुए हैं. वहीं, सुपौल में एक बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण पाये गये है, जिसे बीरपुर अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया. एसकेएमसीएच के उपाधीक्षक सह शिशु विभागाध्यक्ष डॉ गोपाल शंकर सहनी ने बताया कि सकरा रतनपुर के रंजीत कुमार के दो साल के अंकुश कुमार, सकरा बिद्दीपुर के मो मोहम्मद शहाबुद्दीन के ढाई साल के पुत्र मो फरहान और मीनापुर रेपुरा के उमेश गिरि के तीन साल के पुत्र गरीबनाथ गिरि में एइएस की पुष्टि हुई है. इनमें हाइपोग्लाइसीमिया की पुष्टि हुई है. इधर, मंगलवार को चमकी बुखार से पीड़ित दो बच्चे पीकू वार्ड में भर्ती हुए हैं. उनका ब्लड सैंपल लिया गया है.
मुजफ्फरपुर में एइएस से बचाव के लिए कुपोषित बच्चों की खोज की जायेगी. इसके लिए आशा घर-घर जाकर सर्वे करेंगी. इस काम में उनको आंगनबाड़ी सेविका सहायिका का सहयोग मिलेगा. वैसे बच्चे जो किसी भी आंगनबाड़ी से निबंधित नहीं हैं, उनको आंगनबाड़ी से जोड़ा जायेगा. जब बीमार बच्चे आने लगेंगे, तो उनको अस्पताल पहुंचाने में आशा मदद करेंगी.
जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की अगर पहचान समय से होती है, तो वे एइएस से पीड़ित नहीं होंगे. उनमें सामान्य बच्चों की तुलना में 9 से 11 गुना अधिक मृत्यु का खतरा होता है. पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होने वाली मृत्यु का 45 फीसदी कारण अतिगंभीर कुपोषण होता है. इसलिए अगर समय से पहचान हो जाये, तो उन बच्चों के बचाव में मदद मिलेगी. आशा आंगनबाड़ी सेविका के साथ स्वास्थ्य मानक से कम वजन वाले नवजात की सूची तैयार करेंगी. उन्हें बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुनर्वास केंद्र रेफर किया जायेगा.
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बीमार, सुस्त दिखाई देने वाले, स्तनपान न करने वाले या भूख की कमी, दोनों पैरों में सूजन, सांस का तेज चलना, छाती का धंसना, लगातार उल्टी व दस्त होना, मिर्गी या चमकी आना, तेज बुखार, शरीर ठंडा पड़ना, खून की कमी, त्वचा पर घाव व ऊपरी बांह की गोलाई 11.5 सेंटीमीटर से कम यदि ऐसे लक्षण बच्चे में दिखाई दे, तो आशा एएनएम की मदद से उसे रेफर करा देंगी. इसके बाद उसे सदर अस्पताल परिसर स्थित पोषण पुनर्वास सेंटर पर लाया जायेगा. यहां भर्ती होने वाले बच्चे के साथ उसकी माता की सेहत के लिए जरूरी दवा व खुराक मिलेगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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