राजनीतिक पार्टियों का चक्का जाम-बंद : शादी की खुशी में खलल!

Published at :27 Feb 2014 10:53 PM (IST)
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राजनीतिक पार्टियों का चक्का जाम-बंद : शादी की खुशी में खलल!

दिघवारा (सारण). भाजपा का 28 फरवरी को रेल चक्का जाम व जदयू को दो मार्च के बिहार बंद की घोषणा ने प्रखंड के दर्जनों वैवाहिक समारोहों के उत्साह को कम कर दिया है. ऐसी स्थिति में लड़के व लड़की पक्ष द्वारा होनेवाली तैयारियों पर भी प्रतिकूल असर पर रहा है. दूल्हे राजा कैसे ससुराल पहुंचेंगे […]

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दिघवारा (सारण).

भाजपा का 28 फरवरी को रेल चक्का जाम व जदयू को दो मार्च के बिहार बंद की घोषणा ने प्रखंड के दर्जनों वैवाहिक समारोहों के उत्साह को कम कर दिया है. ऐसी स्थिति में लड़के व लड़की पक्ष द्वारा होनेवाली तैयारियों पर भी प्रतिकूल असर पर रहा है. दूल्हे राजा कैसे ससुराल पहुंचेंगे और दुल्हन को लेकर कब तक अपने घर लौटेंगे, इस पर सवाल उठने लगे हैं. सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या बेटी के घर बरात समय पर पहुंचेगी या लड़कीवाले आंखें बिछा कर दूल्हे व बरातियों का इंतजार करते नजर आयेंगे. वहीं, ऐसे आयोजनों में शिरकत करने पहुंचनेवाले दूर-दराज के रिश्तेदारों में से अधिकतर मंजिल तक पहुंचने के लिए जाम से संघर्ष करते दिखेंगे. वहीं, दूसरी तरफ दर्जनों जगहों पर दूसरे प्रदेशों से आनेवाले रिश्तेदारों ने जाम/बंद के प्रोग्राम को देख कर अपना टिकट कैंसिल करा लिया. भाजपा व जदयू के जाम/बंद ने कई शादी पार्टियों का काम तमाम कर दिया है. इसमें दो राय नहीं है.

कई टिकट कराये गये कैंसिल : 28 फरवरी व दो मार्च को राजनीतिक पार्टियों द्वारा चक्का जाम व बंद के मद्देनजर अगले एक सप्ताह तक के कई वैवाहिक आयोजनों में रिश्तेदारों की कम उपस्थित होने की संभावना है. 1,2,3,4,5 मार्च के शादी समारोहों में इस बार स्थानीय स्तर के ही रिश्तेदारों के शामिल होने की संभावना है. शादी के प्लान को लेकर दूर दराज के रिश्तेदारों ने पहले से ही अपना टिकट कन्फर्म करा लिया था. मगर भाजपा व जदयू द्वारा चक्का जाम व बिहार बंद की घोषणा होने के बाद बहुसंख्यक रिश्तेदारों ने रास्ते में रिस्क लेना मुनासिब नहीं समझा और अपना टिकट कैंसिल कराते हुए अपने रिश्तेदारों से शादी में शामिल न होने की माफी भी मांग ली है.

दूल्हे के भी ससुराल पहुंचने पर संकट : दो मार्च अत्यधिक लग्न है और उसी दिन विशेष राज्य के दर्जा के लिए जदयू का बिहार बंद है. ऐसी स्थिति में जिले के अंदर विभिन्न प्रखंडों तक बरात लेकर पहुंचनेवाले दूल्हे का प्रोग्राम नहीं बिगड़ सकता, मगर वैसे दूल्हे जिन्हें बरातियों के साथ अन्य जिलों तक जाना है, वे कैसे पहुंचेंगे, यह सोच कर उनकी नींद हराम है. चलो मान भी लें सेहरा बंधा दूल्हा जाम से भले ही मुक्त हो जाये, मगर बराती कैसे पहुंचेंगे, यह यक्ष प्रश्न है. एक मार्च को भी अत्यधिक लग्न है. ऐसी स्थिति में दो मार्च को बिहार बंद के दिन दूल्हे राजा, दुल्हन के साथ कब तक घर पहुंचेंगे, इस पर भी संशय बना है.

लड़कीवाले भी बेहाल : शादी समारोहों में लड़कीवाले को विशेष तैयारियां करनी होती है. ऐसी स्थिति में मलखाचक, ककढ़िया, त्रिलोकचक, मिरपुर भुआल, मानूपुर व आमी आदि जगहों की लड़की वालों का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है. लिहाजा बरातियों के स्वागत में कमी भी हो सकती है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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