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बिहार में 54 प्रतिशत बिजली या तो चोरी होती है या होता है नुकसान : पीयूष गोयल

Updated at : 26 Jun 2015 9:53 PM (IST)
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बिहार में 54 प्रतिशत बिजली या तो चोरी होती है या होता है नुकसान : पीयूष गोयल

पटना : केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि बिहार में 54 प्रतिशत बिजली या तो चोरी हो जाती है या फिर उसका नुकसान होता है. बिहार ऐसा राज्य है जिसके अपने बिजली घरों से एक यूनिट भी बिजली पैदा नहीं होती. गोयल ने कहा, ‘यह शर्मनाक बात है कि बिहार अपने खुद […]

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पटना : केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि बिहार में 54 प्रतिशत बिजली या तो चोरी हो जाती है या फिर उसका नुकसान होता है. बिहार ऐसा राज्य है जिसके अपने बिजली घरों से एक यूनिट भी बिजली पैदा नहीं होती. गोयल ने कहा, ‘यह शर्मनाक बात है कि बिहार अपने खुद के बिजली घरों से एक यूनिट बिजली भी पैदा नहीं करता. यहां पूरी बिजली की आपूर्ति केंद्र या अन्य राज्यों द्वारा की जाती है. यहां जो भी बिजली घर हैं, वे इतने पुराने हैं कि काम करने लायक नहीं रहे हैं. कुल मिलाकर, यहां जितनी बिजली की आपूर्ति होती है उसमें से 54 प्रतिशत बिजली या तो चोरी हो जाती है या उसका नुकसान होता है.’

उन्होंने कहा, ‘ईमानदार जनता को चोरी गई बिजली की कीमत चुकानी पडती है और नुकसान की भरपाई उन्हें बढे हुए बिजली बिल थमाकर की जाती है. गोयल यहां एनटीपीसी, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और राष्ट्रीय कौशल विकास कोष (एनएसडीएफ) के बीच एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जाने के मौके पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे. यह समझौता अगले पांच साल में सेवा एवं विनिर्माण क्षेत्रों में 25,000 युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया है.

मंत्री ने कहा कि बिहार की बिजली की मांग 2,994 मेगावाट आंकी गई है.यह मात्रा दिल्ली के भी मुकाबले कम है जोकि एक शहर भर है और जहां मांग 5,800 मेगावाट से 6,000 मेगावाट तक पहुंच गई है. उन्होंने कहा, ‘बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत महज 160 यूनिट प्रति वर्ष है जोकि राष्ट्रीय औसत से भी कम है. राष्ट्रीय औसत सालाना 1,000 यूनिट है. यहां कोई उद्योग नहीं है. यहां कई ऐसी जगहें हैं जहां बिजली आती नहीं है और यदि आती है तो रहती नहीं.’ गोयल और केंद्रीय कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रुडी ने भी राज्य में विकास की कमी की ओर इशारा करते हुए लोगों से बदलाव के लिए आह्वान किया.

गोयल द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकडों से बिहार सरकार के उन दावों की पोल खुलती है जिसमें कहा है कि सभी गांवों को पर्याप्त बिजली की आपूर्ति की जा रही है और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं. वर्ष 2012 में कुमार ने कहा था कि यदि वह बिहार के सभी गांवों को बिजली उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं तो वह विधानसभा चुनावों में वोट नहीं मांगेंगे. केंद्रीय बिजली मंत्री ने कहा कि राघोपुर इलाके में करीब एक लाख लोग रहते हैं और यह इलाका राज्य की राजधानी से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन यहां लोग अब भी बिजली की सुविधा से वंचित हैं. गोयल ने अपने विभाग को यहां बिजली उपलब्ध कराने पर तेजी से काम शुरू करने को कहा.

गोयल ने उस स्कूल का जिक्र किया जहां वह अपने अधिकारियों के साथ गये थे, लेकिन यह देखकर चकित रह गये कि ‘स्कूल केवल कागज पर ही मौजूद था.’ उन्होंने उन आंकडों पर आश्चर्य जताया जिसमें कहा गया है बिहार में व्यस्ततम घंटों के दौरान केवल 5.9 प्रतिशत बिजली की कमी रहती है. गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक विकसित बिहार देखना चाहते हैं और केंद्र ने राज्य को अतिरिक्त 1,142 मेगावाट बिजली आबंटित की है एवं यहां अति वृहद बिजली संयंत्र सहित और बिजली संयंत्र लगाने की योजना है.

उन्होंने कहा कि बिहार ने अवसर गंवा दिये और राजनेताओं के चलते कई साल यूं ही बीत गये क्योंकि ये नेता अपने निजी हितों के लिए बिहार को पिछडा रखना चाहते थे. गोयल ने लोगों खासकर युवाओं को आगे आकर एक ‘चमकता बिहार’ बनाने का आह्वान किया.

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