Bihar: बिहार में मनरेगा का बुरा हाल, एक प्रतिशत मजदूरों को भी नहीं मिला सौ दिन का काम

Edited by Ashish Jha
Updated:
विज्ञापन

bihar में मनरेगा का हाल बहुत बुरा है. एक साल में एक प्रतिशत मजदूरों को भी सौ दिन का काम नहीं मिल पा रहा है. इधर महिला और दिव्यागों की संख्या में लगातार कम हो रही है.

विज्ञापन

Bihar: मनोज कुमार, पटना. मनरेगा में बीते वित्तीय वर्ष 2023-24 में महिलाओं की भागीदारी घट गयी है. दिव्यांगों की संख्या भी कम हो गयी है. एससी-एसटी परिवारों की संख्या बढ़ी है. मगर, इसमें मामूली इजाफा है. किसी परिवार को सौ दिनों तक काम करने का औसत इस साल भी एक फीसदी से कम है. बीते पांच वर्षों से एक फीसदी से भी कम परिवारों को सौ दिनों तक काम मिला. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 0.69 फीसदी परिवारों ने ही सौ दिनों तक काम किया. इस वर्ष 47 लाख 46 हजार 59 में 32578 ने ही सौ दिनों तक काम किया. 2022-23 में 50 लाख 14 हजार 363 में 39 हजार 678 को हो सौ दिनों तक काम मिला. यह कुल संख्या का 0.79 प्रतिशत है. वर्ष 2021-22 में 47 लाख 75 हजार 783 में 21975 को ही सौ दिनों का काम मिला. यह कुल संख्या का 0.46 फीसदी है.

महिलाओं व दिव्यांगों की रुचि घटी

वित्तीय वर्ष 2022-23 में मनरेगा में महिलाओं के काम करने का प्रतिशत 56.19 था. जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह घटकर 54.28 हो गया. इसमें लगभग दो फीसदी की कमी हुई है. 2021-22 में 53.19, 2020-21 में 54.63 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी थी. वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 8971 दिव्यांगों को काम मिला. जबकि इसके पूर्व के वर्ष में 9281 दिव्यांगों ने काम किया था. वर्ष 2021-22 में 8548 दिव्यांगों ने काम किया. वर्ष 2023-24 में 20. 85 फीसदी एससी-एसटी परिवारों ने मनरेगा में काम किया. इससे पूर्व के साल में इनकी संख्या 19.22 प्रतिशत ही थी.

Also Read: बिहार में अपनी पारंपरिक सीटों से भी बेदखल हो गयी कांग्रेस, जानें कन्हैया के साथ क्या हुआ खेला

कम और देर से मजदूरी मिलने के कारण घटी दिलचस्पी

मनरेगा मजदूरों को इस साल लगभग जनवरी माह से मजदूरी नहीं मिली है. राज्य में मनरेगा मजदूरी इस साल 245 रुपये की गयी है. बीते चार वर्षों में 57 रुपये ही बढ़ाये गये हैं. बक्सर जिले के इटाढ़ी के मनरेगा मजदूर रामअवधेश प्रसाद ने बताया कि मनरेगा में मजदूरी काफी कम है. काम करने के बाद भी पैसे के लिए राह देखनी पड़ती है. भोजपुर के राजापुर गांव के विष्णु कुमार ने बताया कि मनरेगा में मजदूरी कम होने की वजह से उन्होंने काम करना छोड़ दिया.

विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन