पीवी सिंधू ने जीता जापान ओपन का खिताब, अकाने यामागुची को हराया

स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू
स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने जापान ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया है. उन्होंने फाइनल में जापान की अकाने यामागुची को सीधे सेटों में मात दी. जीत के बाद, सिंधू ने अपने मेंटर विमल सर को उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया है.
स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर तोक्यो में जापान ओपन का खिताब जीता. उन्होंने फाइनल मुकाबले में सीधे सेटों में अकाने यामागुची को मात दी.
खिताब जीतने के बाद पीवी सिंधू ने अपने मेंटर विमल सर को धन्यवाद करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट लिखा है. पीवी सिंधू ने अपने पोस्ट में लिखा है -बहुत-बहुत धन्यवाद, विमल सर. इतने सालों में आपके लगातार गाइडेंस, सपोर्ट और मेंटरशिप के लिए धन्यवाद. आप सच में इंडियन बैडमिंटन के सबसे अच्छे लोगों में से एक हैं. मैं हमेशा आपके और मेरे पिता के रिश्ते के लिए शुक्रगुजार हूं.वो सारी हिम्मत बढ़ाने वाली बातें, वो सारे लंबे मैसेज, जिसने मेरा हौसला बढ़ाया.प्लीज इंडियन बैडमिंटन की रीढ़ बने रहें. आप जैसे बहुत कम लोग हैं.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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