उपलब्धियों को भूल जाना, मेरी सफलता का राज : विश्वानाथन आनंद

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मुंबई : अपने शानदार करियर में कई सफलताएं अर्जित करने वाले भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने कहा है कि उनकी सफलता में जिस चीज ने सबसे अधिक योगदान दिया है वह उपलब्धियों को भूल जाना है जिससे कि उनकी प्रेरणा बरकरार रहे. पांच बार के विश्व चैम्पियन आनंद ने कहा कि वह […]

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मुंबई : अपने शानदार करियर में कई सफलताएं अर्जित करने वाले भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने कहा है कि उनकी सफलता में जिस चीज ने सबसे अधिक योगदान दिया है वह उपलब्धियों को भूल जाना है जिससे कि उनकी प्रेरणा बरकरार रहे. पांच बार के विश्व चैम्पियन आनंद ने कहा कि वह अपने लिए जल्दी जल्दी नये लक्ष्य तय करना पसंद करते हैं.

आनंद ने कहा, सफलता का पहला नियम यह है कि आत्ममुग्धता के लिए कोई जगह नहीं है. आपको हमेशा यह मानना होगा कि हमेशा सीखने के लिए कुछ रहता है. आपको अपने लिए नये लक्ष्य तय करते रहना होगा. मैं 2000 में पहली बार विश्व चैम्पियन बना और वह मेरा तीसरा प्रयास था.

आनंद ने हाल में आईएमसी रामकृष्ण बजाज राष्ट्रीय क्वालिटी अवार्ड के दौरान कहा, विफलताओं ने मुझे लगातार प्रयास करने के लिए प्रेरित किया और हर बार मैं बेहतर होता चला गया. दूसरी बार में मैंने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया और तीसरी बार मैं दूसरे स्थान पर नहीं आया. एक बार विश्व खिताब के करीब पहुंचने के बाद मुझे पता था कि जब तक आप अपना काम खत्म नहीं कर देते तब तक प्रयास जारी रखना चाहिए.

आनंद ने उस समय को भी याद किया जब वह भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने और कहा कि उस समय खिताब जीतने के तुरंत बाद उनका ध्यान भंग हो गया था. उन्होंने कहा, जब मैं युवा था तो प्रत्येक चरण के लिए लक्ष्य थे. पहला अंतरराष्ट्रीय मास्टर बनना, इसके बाद ग्रैंडमास्टर बनना और फिर विश्व चैम्पियनशिप के लिए प्रयास करना.

आनंद ने कहा, 1987 में विश्व जूनियर खिताब जीतने के तुरंत बाद जब मैंने ग्रैंडमास्टर खिताब जीता तो छह महीने के लिए अजीब समय आया जब मैं दोबारा ग्रैंडमास्टर के स्तर का नतीजा हासिल नहीं कर पाया. हालांकि मैं ग्रैंडमास्टर बना गया था, मुझे खिताब मिल गया था लेकिन बस मैं ग्रैंडमास्टर के स्तर वाला नतीजा दोबारा हासिल नहीं कर पाया.

उन्होंने कहा, मुझे बाद में पता चला कि क्या हुआ था जिसके बारे में काफी ग्रैंडमास्टर ने मुझे बताया था. उन सभी ने मुझे कहा कि हां, अपना खिताब लेने के छह महीने के समय के दौरान उन्हें भी इस तरह की स्थिति का सामना करना पडा था. आनंद ने कहा कि उन्होंने अपनी विफलताओं से सीखा है क्योंकि बिना अपेक्षाओं के आप बेहतर खेलना शुरु कर देते हो और आप अपने मजबूत पक्षों और कमजोर पक्षों को साफ तौर पर देख सकते हो.

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