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द्रोणाचार्य पुरस्कार से वंचित किये जाने पर भड़के पैरा स्पोर्ट्स कोच सत्यनारायण

नयी दिल्ली : पैरा स्पोर्ट्स कोच सत्यनारायण शिमोगा ने दावा किया कि सरकार का उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से वंचित करना गलत है क्योंकि दिल्ली की अदालत में लंबित अवमानना के मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं हुए हैं. रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलू के कोच रहे सत्यनारायण को इस साल […]

नयी दिल्ली : पैरा स्पोर्ट्स कोच सत्यनारायण शिमोगा ने दावा किया कि सरकार का उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से वंचित करना गलत है क्योंकि दिल्ली की अदालत में लंबित अवमानना के मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं हुए हैं.

रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलू के कोच रहे सत्यनारायण को इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चुने गए कोचों की सूची से बाहर कर दिया गया क्योंकि दिल्ली के साकेत में चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में उनके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है.

पता चला है कि जब सत्यनारायण के नाम की सिफारिश द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए की गई थी तो कई लोगों ने आपत्ति जताई थी. सत्यनारायण ने बेंगलुरु से फोन पर बताया, मुझे द्रोणाचार्य पुरस्कार हासिल करके के मौके से वंचित करना गलत है. कुछ लोग मेरी उपलब्धियों से जलते हैं और द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए मेरे नामांकन के खिलाफ उन्होंने गलत आरोप लगाए.

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उन्होंने कहा, मैं मीडिया की इन खबरों को सुनकर हैरान था कि अवमानना के इस मामले के आधार पर मेरे नाम हटा दिये गये. सत्यनारायण ने कहा, यह मामला किसी की निजी शिकायत से संबंधित है जो उसे भारतीय पैरालंपिक समिति से बाहर किए जाने पर बदला लेना चाहता है. साथ ही यह मामला आरोप पत्र दाखिल करने के चरण पर नहीं पहुंचा है और सिर्फ नोटिस भेजे गए हैं. अगर इस आधार पर मुझे द्रोणाचार्य पुरस्कार से वंचित किया जाता है तो मुझे लगता है कि यह सही नहीं है.

इस मामला की बात की जा रही है वह पीसीआई के पूर्व प्रमुख राजेश तोमर की शिकायत पर दर्ज किया है. तोमर को 2015 में कुप्रबंधन और कोष में अनियमितता के आरोप में पैरा खेलों की राष्ट्रीय संस्था ने बाहर कर दिया था.

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यह पूछने पर कि क्या इस ममले में वह कानून का सहारा लेंगे, सत्यनारायण ने कहा, मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो पुरस्कार हासिल करने के लिए अदालत जाएगा. मैं खेल मंत्रालय के फैसले का सम्मान करता हूं. लेकिन मैं दुनिया को बताना चाहता हूं कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया और मेरी उपलब्धियों के बावजूद मुझे इस पुरस्कार से वंचित किया गया.

पीसीआई सचिव रहे सत्यनारायण ने कहा कि उन्होंने खेल मंत्री विजय गोयल और द्रोणाचार्य पुरस्कार समिति के अध्यक्ष पुलेला गोपीचंद को पत्र लिखकर उन्होंने अपना पक्ष रखने की स्वीकृति देने को कहा था लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला.

सत्यनारायण ने कहा कि तोमर तत्कालीन पीसीआई के पदाधिकारियों को परेशान करना चाहते हैं जिन्होंने बेंगलुरु में बैठक करके प्रस्ताव पारित करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया था. सत्यनारायण ने कहा कि उन्होंने तोमर का समर्थन नहीं किया इसलिए उन्हें पक्ष बनाया गया.

Prabhat Khabar Digital Desk
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