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ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने किया अपने अगले लक्ष्य का खुलासा

Updated at : 08 Aug 2021 1:55 PM (IST)
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ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने किया अपने अगले लक्ष्य का खुलासा

Tokyo: India's Neeraj Chopra holds the gold medal at the podium during the medal ceremony, after winning in the final of the men's javelin throw event at the 2020 Summer Olympics, in Tokyo, Saturday, Aug. 7, 2021. Chopra became the first to win Athletics Gold for India ever. (PTI Photo/Gurinder Osan)(PTI08_07_2021_000253A)

टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने अपने अगले लक्ष्य का खुलासा किया है.

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नयी दिल्ली : ओलिंपिक में गोल्ड जीतने वाले भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा ने अब अपने अगले लक्ष्य का खुलासा किया है. नीरज चोपड़ा ने अपने दूसरे ही प्रयास में 87.58 मीटर भाला फेंक कर एक कीर्तिमान बनाया. नीरज ने अपने अगले लक्ष्य की जानकारी देते हुए कहा कि अब मेरा अगला टारगेट 90 मीटर के आंकड़े को पार करना है. उन्होंने कहा कि मैंने फाइनल मुकाबले में भी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली.

वास्तव में, ओलिंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले केवल दूसरे भारतीय और देश का पहला एथलेटिक्स पदक जीतने वाले चोपड़ा शनिवार को खेलों के रिकॉर्ड (90.57 मीटर) तक पहुंचने का प्रयास करते रहे. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. चोपड़ा ने अपने ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद कहाकि भाला फेंक एक बहुत ही तकनीकी घटना है और बहुत कुछ दिन के फॉर्म पर निर्भर करता है. कुछ भी हो सकता है. इसलिए, मेरा अगला लक्ष्य 90 मीटर (अंक) को पार करना है.

चोपड़ा ने कहा कि मैं इस साल सिर्फ ओलिंपिक पर ध्यान केंद्रित कर रहा था. अब जब मैंने स्वर्ण पदक जीत लिया है, तो मैं आगामी प्रतियोगिताओं के लिए आगे की योजना बनाऊंगा. भारत आने के बाद, मैं फिर से अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए विदेशी वीजा की तलाश करूंगा. 13 जुलाई को गेट्सहेड डायमंड लीग से हटने के बाद चोपड़ा ने कहा था कि वह ओलिंपिक के बाद एलीट एक दिवसीय बैठक श्रृंखला के शेष चरणों में भाग ले सकते हैं.

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लुसाने (26 अगस्त) और पेरिस (28 अगस्त) के साथ-साथ ज्यूरिख फाइनल (9 सितंबर) में पुरुषों की भाला प्रतियोगिताएं होंगी. हरियाणा में पानीपत के पास खंडरा गांव के एक किसान के 23 वर्षीय बेटे ने फाइनल में 87.58 मीटर के दूसरे दौर के थ्रो का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ट्रैक और फील्ड पदक के लिए भारत के 100 साल के इंतजार को समाप्त कर दिया.

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ओलिंपिक किसी भी एथलीट के लिए सबसे भव्य मंच है और डराने वाला हो सकता है लेकिन चोपड़ा के लिए नहीं. जिन्होंने कहा कि कोई दबाव नहीं लिया और पूरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि कोई दबाव नहीं था और मैं इसे (ओलिंपिक) किसी भी आयोजन की तरह ही ले रहा था. यह ऐसा था जैसे मैं पहले इन एथलीटों के खिलाफ खेल चुका हूं और चिंता का कोई कारण नहीं है. मैं अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम था. इससे मुझे सोना जीतने में मदद मिली.

उन्होंने कहा कि हां, मैंने सोचा था कि भारत ने अब तक एथलेटिक्स में पदक नहीं जीता. लेकिन एक बार जब मैं अपना भाला पकड़ लेता हूं, तो ये सब चीजें मेरे दिमाग में नहीं आती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मुझे ओलिंपिक से पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेलने को मिलीं. मैं इसके लिए बेताब था. मैंने ओलंपिक पोडियम टारगेट स्कीम (TOPS), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) से कुछ व्यवस्था करने का अनुरोध किया. उन्होंने व्यवस्था की. और उसी के कारण, मैं अभी यहां हूं.

Posted By: Amlesh Nandan.

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