CWG 2026: बारिश के बावजूद क्यों नहीं होता रिजर्व डे? जानिए एथलेटिक्स के नियम

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लॉन्ग जंप इवेंट के दौरान बारिश होते हुए (एक्स)

लॉन्ग जंप इवेंट के दौरान बारिश होते हुए (एक्स)

CWG 2026 Rain Rules: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बारिश के बावजूद खेल क्यों जारी रहते हैं? जानिए एथलेटिक्स के खास नियम, खिलाड़ियों की सुरक्षा और 'रिजर्व डे' पर आयोजकों का रुख. क्या बारिश में खेल रोकना संभव है? एथलेटिक्स के नियमों के पीछे छिपे हैं महत्वपूर्ण कारण, जो सुरक्षा और समय-सारणी दोनों को ध्यान में रखते हैं.

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CWG 2026 Rain Rules: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे शानदार मुकाबलों के साथ-साथ वहां की रोज की तेज बारिश भी खूब चर्चा में है. गीले ट्रैक पर दौड़ते खिलाड़ियों और लंबी कूद जैसे खेलों को देखकर दर्शकों के मन में यह सवाल आता है कि इतनी बारिश में भी खेल क्यों नहीं रोके जाते, क्या इससे खिलाड़ियों की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ती, और आयोजकों के पास 'रिजर्व डे' का विकल्प क्यों नहीं होता? असल में, इन सभी सवालों के जवाब अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स के पक्के नियमों और सालों के अनुभव में छिपे हैं.

सिर्फ बारिश प्रतियोगिता रोकने का आधार नहीं

विश्व एथलेटिक्स के नियमों के मुताबिक सिर्फ बारिश होने की वजह से खेल नहीं रोका जाता है, बल्कि मुकाबले तब तक चलते रहते हैं जब तक ट्रैक और मैदान सुरक्षित हैं और खिलाड़ियों को कोई बड़ा खतरा नहीं है. आज के आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक में पानी निकालने की बहुत अच्छी व्यवस्था होती है, जिससे बारिश का पानी तुरंत हट जाता है और मैदान पर पानी नहीं भरता, जिससे खिलाड़ियों को दौड़ने में अच्छी पकड़ (ग्रिप) मिलती रहती है. तकनीकी अधिकारी खेल को तभी रोकते हैं या टालते हैं जब बारिश के कारण ट्रैक बहुत ज़्यादा फिसलने लगे, देखने में परेशानी हो या फिर बिजली कड़कने जैसी खतरनाक स्थिति बन जाए.

बारिश में चोट का खतरा जरूर बढ़ता है

बारिश के दौरान खिलाड़ियों के सामने चुनौती निश्चित रूप से बढ़ जाती है. विशेषकर स्प्रिंट स्पर्धाओं में शुरुआती ब्लॉक से तेज शुरुआत करना कठिन हो जाता है. वहीं लंबी कूद, तिहरी कूद, पोल वॉल्ट और थ्रो इवेंट्स में रनवे तथा थ्रोइंग सर्किल पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है. फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पूरे वर्ष अलग-अलग मौसम में अभ्यास करते हैं. उन्हें बारिश, ठंड और तेज हवा जैसी परिस्थितियों के अनुरूप अपनी तकनीक में बदलाव करने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

आयोजक अपनाते हैं कई सुरक्षा उपाय

मौसम खराब होने पर आयोजन समिति केवल खिलाड़ियों के भरोसे नहीं रहती, बल्कि कई अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम भी किए जाते हैं.

  • थ्रोइंग सर्किल और जंप रनवे को लगातार सुखाया जाता है.
  • प्रत्येक प्रतियोगिता से पहले ट्रैक और मैदान का निरीक्षण किया जाता है.
  • जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों को अतिरिक्त वार्म-अप का समय दिया जाता है.
  • प्रतियोगिता में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों की नियमित जांच की जाती है.
  • तकनीकी अधिकारी पूरे सत्र के दौरान मौसम और ट्रैक की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं.

यदि किसी भी समय स्थिति असुरक्षित लगती है तो मुकाबलों को तुरंत रोका या स्थगित किया जा सकता है.

रिजर्व डे रखना क्यों संभव नहीं?

कई दर्शकों का मानना है कि क्रिकेट की तरह एथलेटिक्स में भी 'रिजर्व डे' यानी अतिरिक्त दिन रखा जाना चाहिए, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है क्योंकि एथलेटिक्स कोई एक मैच नहीं है. इसमें कई दिनों तक सुबह और शाम अलग-अलग सत्रों में दर्जनों स्पर्धाएं होती हैं, जिनमें सैकड़ों खिलाड़ी हीट, सेमीफाइनल और फाइनल खेलते हैं. इसके अलावा, कई एथलीट एक से ज्यादा खेलों में भी हिस्सा लेते हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी एक दिन का कार्यक्रम आगे बढ़ाना पड़े, तो पूरा का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा सकता है.

रिजर्व डे से पैदा होंगी कई समस्याएं

यदि एथलेटिक्स में रिजर्व डे रखा जाए तो कई बड़ी चुनौतियां सामने आएंगी-

  • टीवी प्रसारण का पूरा कार्यक्रम बदल जाएगा.
  • पदक वितरण समारोह प्रभावित होंगे.
  • कई खिलाड़ियों की अलग-अलग स्पर्धाओं का समय टकरा सकता है.
  • हजारों खिलाड़ियों, अधिकारियों और स्वयंसेवकों की यात्रा तथा आवास व्यवस्था बदलनी पड़ेगी.
  • पूरे टूर्नामेंट की समय-सारिणी पर व्यापक असर पड़ेगा.

इसी वजह से एथलेटिक्स का कार्यक्रम बेहद सघन और सीमित समय में तैयार किया जाता है, जिसमें बदलाव की गुंजाइश बहुत कम होती है.

क्या भविष्य में नियम बदल सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में लगातार तेज बारिश और खराब मौसम बढ़ रहा है. इसे देखते हुए बड़े खेल संगठन सुरक्षा के कड़े नियमों पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि, जानकारों का मानना है कि बड़े एथलेटिक्स टूर्नामेंट्स में खेल के लिए अलग से अतिरिक्त दिन यानी 'रिजर्व डे' मिलने की संभावना फिलहाल बहुत कम है. इसलिए, खेल समितियां अलग दिन रखने के बजाय मैदानों में पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था, सटीक मौसम पूर्वानुमान और आधुनिक सुरक्षा उपायों पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं ताकि खराब मौसम में भी खेल सुरक्षित रूप से पूरे किए जा सकें.

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ऋतु राज

लेखक के बारे में

By ऋतु राज

ऋतुराज प्रभात खबर डिजिटल में स्पोर्ट्स कंटेंट राइटर हैं. लीची की नगरी मुजफ्फरपुर (बिहार) से ताल्लुक रखने वाले ऋतुराज के पास डिजिटल खेल पत्रकारिता में 1 साल का गहरा अनुभव है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से साल 2025 में मीडिया रिसर्च में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खेल की हर छोटी-बड़ी और वायरल होती खबरों पर पैनी नजर रखना उनकी खासियत है. उनका मुख्य लक्ष्य प्रभात खबर के पाठकों तक खेल जगत की हर सटीक और विश्लेषण से भरी खबर सबसे पहले पहुंचाना है. पढ़ने और क्रिकेट खेलने के शौकीन ऋतुराज खेल को सिर्फ कवर नहीं करते, बल्कि उसकी बारीकियों को जीते हैं.

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