कप्तानी छोड़ने के कई साल बाद विराट कोहली का छलका दर्द, क्यों मानते हैं द्रविड़ और राठौड़ का अहसान

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कप्तानी छोड़ने के कई साल बाद विराट कोहली ने छलका दर्द, क्यों मानते हैं द्रविड़ और राठौड़ का अहसान

विराट कोहली और राहुल द्रविड़ (फोटो-सोशल मीडिया)

भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने कप्तानी छोड़ने के बाद अपने संघर्ष और मानसिक दबाव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे पूर्व कोच राहुल द्रविड़ और बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ ने मुश्किल दौर में उनका मनोबल बढ़ाया.

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Virat Kohli: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने अपनी कप्तानी के दौर और उसके बाद के मुश्किल समय को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं. बेंगलुरू में आयोजित एक स्पोर्ट्स समिट के दौरान कोहली ने बताया कि लगभग 9 साल तक टीम इंडिया का नेतृत्व करने के दौरान उन पर कितना मानसिक दबाव था और कप्तानी छोड़ने के बाद पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने किस तरह उन्हें संभाला.

कप्तानी का मानसिक बोझ

विराट कोहली ने अपने कप्तानी के दिनों को याद करते हुए कहा कि नेतृत्व की भूमिका में होने पर आपको अपनी भावनाओं को दबाकर केवल टीम के बारे में सोचना पड़ता है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, ‘जब मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो महसूस किया कि लगभग 9 सालों तक मुझसे किसी ने यह नहीं पूछा कि आप कैसे हैं. कप्तानी में आपके पास खुद के लिए सोचने का समय होता है या नहीं’. हालांकि, कोहली ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की कोई शिकायत नहीं है और मौका मिले तो वह दोबारा भी ऐसा ही करेंगे.

द्रविड़ और राठौड़ ने दिया नया जीवन

साल 2020 से 2022 के बीच टेस्ट क्रिकेट में अपने खराब फॉर्म के दौरान, जब तीन साल तक उनके बल्ले से कोई शतक नहीं निकला, कोहली ने पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ और बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ का आभार जताया. कोहली ने कहा, ‘राहुल भाई और विक्रम राठौड़ ने उस मुश्किल दौर में मानसिक रूप से मेरा बहुत ध्यान रखा. उन्होंने मुझे एहसास दिलाया कि मैं टीम के लिए कितना मायने रखता हूं. उनके इसी रवैये के कारण मुझे खेल में दोबारा मजा आने लगा’.

वरिष्ठ खिलाड़ियों को भी होता है इम्पोस्टर सिंड्रोम

कोहली ने माना कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल बिताने के बावजूद, उनके मन में असुरक्षा की भावना कभी-कभी आती है. उन्होंने कहा, ‘जब मैं नेट्स पर जाता हूं, तो लगता है कि युवा खिलाड़ी मुझे देख रहे हैं. अगर एक भी सेशन खराब जाए, तो मन में यह ख्याल आता है कि वे क्या सोचेंगे, क्या मैं वही खिलाड़ी हूं जो इतने सालों से खेल रहा हूं। राहुल भाई खुद इस दौर से गुजरे थे, इसलिए वे मेरी असुरक्षा को बखूबी समझते हैं.

करियर की शुरुआत में आराम की तलाश न करें

वर्कलोड मैनेजमेंट पर विराट ने अहम सलाह दी. उन्होंने कहा,’युवा खिलाड़ियों को करियर की शुरुआत में आराम की तलाश नहीं करनी चाहिए. पहले अपनी क्षमता पहचानें कि शरीर और दिमाग कितना दबाव झेल सकते हैं. जब आप अपनी क्षमता को पहचान लेते हैं, तभी असली संतुलन समझ में आता है कि कब रुकना है और कब आराम करना है. जल्दी आराम खोजने वाले खिलाड़ी कभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाते’.

अरकम अब्दुल मन्नान

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उज्जवल सिन्हा

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By उज्जवल सिन्हा

उज्जवल कुमार सिन्हा | स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

उज्जवल कुमार सिन्हा एक अनुभवी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हैं और पिछले छह वर्षों से खेल पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स सेक्शन में लीड की भूमिका निभा रहे हैं, जहां कंटेंट प्लानिंग, SEO-आधारित डिजिटल कंटेंट, एक्सप्लेनर, डेटा-ड्रिवन स्टोरी, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट, लाइव कवरेज और प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की डिजिटल रणनीति से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं.

पत्रकारिता का अनुभव

अपने करियर के दौरान उज्जवल ने क्रिकेट, फुटबॉल, प्रो कबड्डी लीग, महिला क्रिकेट, रणजी ट्रॉफी, झारखंड प्रीमियर लीग (JPL) और अन्य प्रमुख खेल आयोजनों की व्यापक कवरेज की है. वह मैच रिपोर्ट, खिलाड़ियों की प्रोफाइल, रिकॉर्ड्स एवं आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण, एक्सप्लेनर, विशेष फीचर स्टोरी और खेल जगत से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन करते हैं. उनकी विशेष रुचि डेटा-आधारित खेल विश्लेषण और जटिल खेल विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में है.

पेशेवर सफर

प्रभात खबर से पहले उज्जवल नवभारत, CricTracker, स्पोर्ट्स तक (इंडिया टुडे ग्रुप), जनसत्ता और एपीएन न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खिलाड़ियों, कोचों, खेल प्रशासकों और स्पोर्ट्स कमेंटेटरों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. डिजिटल पत्रकारिता, रियल-टाइम न्यूज कवरेज, SEO रणनीति और ऑडियंस-केंद्रित कंटेंट निर्माण उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल हैं.

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

शैक्षणिक रूप से उज्जवल ने संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से मास कम्युनिकेशन में स्नातक तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है.

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पत्रकारिता में आने से पहले उज्जवल स्वयं क्रिकेट खेल चुके हैं और बिहार स्टेट क्रिकेट कैंप का हिस्सा रहे हैं. मैदान पर खेलने का यह अनुभव उन्हें खेल की तकनीकी बारीकियों, खिलाड़ियों की मानसिकता, रणनीति और मैच परिस्थितियों को गहराई से समझने में मदद करता है. यही अनुभव उनकी रिपोर्टिंग और विश्लेषण को अधिक सटीक, तथ्यपरक और विश्वसनीय बनाता है.

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