घोड़े पर बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे बगोदर के कासीम अंसारी, घुड़सवारी कर बालकों को आता है मजा

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घोड़े पर सवार बगोदर के कासिम अंसारी के बच्चे. फोटो: प्रभात खबर

Giridih News: गिरिडीह के बगोदर निवासी कासीम अंसारी पेट्रोल बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए घोड़े से अपने बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे हैं. उनकी अनोखी पहल इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. बच्चे भी घुड़सवारी करते हुए स्कूल जाने का भरपूर आनंद उठा रहे हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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बगोदर से कुमार गौरव की रिपोर्ट

Giridih News: झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर में एक अनोखी तस्वीर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. बगोदर-हजारीबाग रोड निवासी कासीम अंसारी इन दिनों घोड़े से अपने बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे हैं. उनका यह अंदाज इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. सड़क पर जब कासीम अपने दोनों बच्चों को घोड़े पर बैठाकर स्कूल लेकर निकलते हैं तो राह चलते लोग उन्हें देखने के लिए ठहर जाते हैं. कासीम अंसारी का कहना है कि मौजूदा समय में बढ़ते प्रदूषण, पेट्रोल की समस्या और दुनिया में चल रहे हालात को देखते हुए उन्होंने यह अनोखी पहल शुरू की है.

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दो महीने पहले छोड़ी बाइक, खरीदा घोड़ा

कासीम अंसारी ने बताया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले मोटरसाइकिल से चलना लगभग बंद कर दिया. इसके बाद उन्होंने कोलकाता से एक घोड़ा खरीदा और उसी का उपयोग अपने दैनिक कार्यों में करना शुरू कर दिया. अब वह बाजार से सब्जी लाने से लेकर आसपास के पांच किलोमीटर तक की दूरी घोड़े से ही तय करते हैं. उनका कहना है कि यह न सिर्फ एक अलग अनुभव है बल्कि इससे ईंधन की बचत भी हो रही है.

बच्चों को भी घुड़सवारी में आता है मजा

कासीम रोज अपने दोनों बच्चों को घोड़े पर बैठाकर स्कूल पहुंचाते हैं. बच्चों को भी यह तरीका बेहद पसंद आ रहा है. घुड़सवारी करते हुए स्कूल जाना उनके लिए किसी रोमांच से कम नहीं है. इलाके के लोग भी इस दृश्य को देखकर हैरान होते हैं. कई लोग इसे कासीम का शौक बता रहे हैं, तो कुछ लोग उन्हें पर्यावरण प्रेमी मान रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां हर कोई मोटर वाहन पर निर्भर हो चुका है, वहां कासीम का यह कदम अलग सोच को दर्शाता है.

पर्यावरण बचाने का संदेश

कासीम अंसारी का कहना है कि वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हैं. उनका मानना है कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग मोटर वाहन का कम इस्तेमाल करें तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि देश में लगातार लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की जा रही है. इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उन्होंने घोड़े का उपयोग शुरू किया. उनका कहना है कि इससे उनका शौक भी पूरा हो रहा है और पर्यावरण को बचाने में भी मदद मिल रही है.

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शिक्षा को लेकर भी गंभीर हैं कासीम

कासीम अंसारी ने बताया कि उन्हें शिक्षा से काफी लगाव है और वह अपने दोनों बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रयासरत हैं. इसी वजह से वह खुद रोज बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं. उनका यह अलग अंदाज अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इसे आधुनिक दौर में पारंपरिक जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा उदाहरण मान रहे हैं. कासीम की पहल यह संदेश भी दे रही है कि यदि इच्छा हो तो छोटी-छोटी कोशिशों से भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.

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