ENG Vs NZ, World Cup: क्या न्यूजीलैंड की टीम आज इंग्लैंड से ले पाएगी बदला, जानें क्या है हेड टू हेड रिकाॅर्ड

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 05 Oct 2023 12:44 PM

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इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड पर हावी नजर आती है. अबतक दोनों टीमों के बीच कुल 95 ओडीआई खेले गए हैं, जिनमें से 45 इंग्लैंड ने जीते हैं, जबकि 44 में न्यूजीलैंड को जीत मिली है. दो मैच टाई हुए हैं और चार का कोई परिणाम नहीं निकला है.

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ICC World Cup : आईसीसी वर्ल्डकप 2023 का पहला मुकाबला आज दोपहर दो बजे से अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. यह मुकाबला बहुत ही अहम है क्योंकि इस मैच में वो दोनों टीमें आमने-सामने हैं जिन्होंने विश्वकप 2019 का फाइनल मैच खेला था. मैच काफी रोमांचक था और सुपर ओवर में भी दोनों टीमें एक दूसरे को शिकस्त नहीं दे पाई थीं, ऐसे में फैसला बाउंड्री काउंट से हुआ था. इंग्लैंड की टीम जब विजेता घोषित हुई तो क्रिकेट फैंस की सहानुभूति न्यूजीलैंड के प्रति थी क्योंकि उन्होंने शानदार खेल दिखाया था और वे अबतक एक भी विश्वकप जीतने में सफल नहीं रहे हैं.

इंग्लैंड की टीम है हावी

अब जबकि इंग्लैंड की टीम विश्वकप के पहले मुकाबले में आमने-सामने होगी, न्यूजीलैंड की टीम उनसे अपनी हार का बदला लेना चाहेगी. इनदोनों टीमों के हालिया रिकाॅर्ड पर अगर नजर डालें तो दोनों टीमें 2023 में चार मैच खेल चुकी हैं, जिनमें से तीन इंग्लैंड ने जीता है और एक मैच न्यूजीलैंड के खाते में गया है. 15 सिंतबर को इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 100 रन से जीत दर्ज की. 13 सितंबर को इंग्लैंड ने 181 रन से जीत दर्ज की, जबकि 10 सितंबर को इंग्लैंड ने 79 रन से जीत दर्ज की थी. वहीं आठ सितंबर को खेले गए मैच में न्यूजीलैंड ने आठ विकेट से जीत दर्ज की थी. 2019 में इनके बीच एक मैच खेला गया था, जो टाई रहा था. इस लिहाज से इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड पर हावी नजर आती है. अबतक दोनों टीमों के बीच कुल 95 ओडीआई खेले गए हैं, जिनमें से 45 इंग्लैंड ने जीते हैं, जबकि 44 में न्यूजीलैंड को जीत मिली है. दो मैच टाई हुए हैं और चार का कोई परिणाम नहीं निकला है.

World Cup 2023: दोनों टीम की प्लेइंग इलेवन

इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग इलेवन

जॉनी बेयरस्टो, डेविड मालन, जो रूट, बेन स्टोक्स/हैरी ब्रूक, जोस बटलर (कप्तान, विकेटकीपर), लियाम लिविंगस्टोन, मोइन अली, सैम कुरेन, क्रिस वोक्स, आदिल राशिद, मार्क वुड.

न्यूजीलैंड की संभावित प्लेइंग इलेवन

डेवोन कॉनवे, विल यंग, डेरिल मिशेल, टॉम लैथम (कप्तान, विकेटकीपर), ग्लेन फिलिप्स, जिमी नीशम/रचिन रवींद्र, मिशेल सेंटनर, ईश सोढ़ी, मैट हेनरी, ट्रेंट बोल्ट, लॉकी फर्ग्यूसन.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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