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क्‍या मोदी के खिलाफ मानहानि का दावा ठोकेंगे सुरेश रैना,रवींद्र जडेजा ?

Updated at : 29 Jun 2015 6:46 PM (IST)
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क्‍या मोदी के खिलाफ मानहानि का दावा ठोकेंगे सुरेश रैना,रवींद्र जडेजा ?

भारतीय टीम के दो दिग्‍गज खिलाडियों सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा और वेस्‍टइंडीज के ब्राओ पर आईपीएल के दौरान रिश्‍वत लेने के ललित मोदी के आरोप में आज आईसीसी और बीसीसीआई ने अपना फैसला सुना दिया है. दोनों ही संस्‍थाओं की ओर से इन खिलाडियों को क्‍लीन चीट मिल गयी है. दोनों संस्‍थान की ओर से […]

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भारतीय टीम के दो दिग्‍गज खिलाडियों सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा और वेस्‍टइंडीज के ब्राओ पर आईपीएल के दौरान रिश्‍वत लेने के ललित मोदी के आरोप में आज आईसीसी और बीसीसीआई ने अपना फैसला सुना दिया है. दोनों ही संस्‍थाओं की ओर से इन खिलाडियों को क्‍लीन चीट मिल गयी है.

दोनों संस्‍थान की ओर से क्‍लीन चीट मिल जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि ललित मोदी ने इन खिलाडियों पर झुठा ओराप लगाया था. अब इस मामले में सुरेश रैना,रवींद्र जडेजा और ब्राओ चाहें तो ललित मोदी पर मानहानि का दावा ठोक‍ सकते हैं. आईसीसी सूत्रों ने भी कहा है कि यह अब क्रिकेटरों पर निर्भर करता है कि वे ललित के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करते हैं या नहीं.

बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर से जब ललित के जून 2013 में आईसीसी को भेजे गये पत्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, इसमें कुछ भी नहीं है. इस पत्र में ललित ने दावा किया था कि भारत के दो (सुरेश रैन और रवींद्र जडेजा) और वेस्टइंडीज (ब्राओ) के एक क्रिकेटर में से प्रत्येक को 20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.
ठाकुर ने आज यहां कहा, ललित मोदी ने आईसीसी को पत्र लिखा, इसलिए उन्होंने बीसीसीआई को पत्र के बारे में अवगत कराया. तीनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं. आईसीसी से अब तक इन खिलाडियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है और इसलिए यह एक तरह से उन्हें खेलने के लिये क्लीन चिट है.
वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को कोई सबूत नहीं मिले हैं और विस्तृत जांच के बाद इस मामले को खत्म कर दिया गया. खेल की संचालन संस्था ने कल संकेत दिए थे कि उसे इन तीन क्रिकेटरों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले जब उसने बयान में कहा, एसीएसयू ने अपनी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरुप इस सूचना पर भी कार्रवाई की जिसमें बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई से सूचना साझा करना भी शामिल है. विश्वसनीय सूत्रों ने कहा कि अगर कोई गलत काम किया गया होता तो आईसीसी की भ्रष्टाचार रोधी और सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) इस मामले में जांच करती.
सूत्र ने कहा, अगर एसीएसयू को तीनों खिलाडियों के खिलाफ कोई साक्ष्य मिलता तो वह उनके खिलाफ आईसीसी की भ्रष्टाचार रोधी संहिता के उल्लंघन के आरोप लगाती. अगर दो साल में ऐसा नहीं हुआ और खिलाड़ी अब भी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं तो इसका स्पष्ट मतलब है कि ऐसे साक्ष्य नहीं मिले कि आरोप लगाए जाएं.
उन्होंने कहा, जब भी इसके समर्थन में नये साक्ष्य मुहैया कराए जाएंगे तो इस मामले को पुन: खोला जा सकता है लेकिन फिलहाल क्रिकेटरों के खिलाफ कोई आरोप नहीं है. गौरतलब हो कि आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी ने तीनों खिलाडियों पर मुंबई के एक व्यवसायी से रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. उन्‍होंने आईसीसी को पत्र लिखकर क्रिकेटरों की ईमानदारी पर सवाल उठाए थे और जांच की मांग की थी.
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