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महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास पर फिर छिड़ी बहस, माही घर में मजा ले रहे जीप ''ग्रैंड चिरोकी'' का

Updated at : 23 Sep 2019 5:16 PM (IST)
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महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास पर फिर छिड़ी बहस, माही घर में मजा ले रहे जीप ''ग्रैंड चिरोकी'' का

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट में संन्यास किसी पहेली की तरह है जहां कुछ खिलाड़ियों ने सही समय यह फैसला किया जबकि कुछ इस बारे में फैसला लेने के लिए जूझते दिखे. महेंद्र सिंह धौनी के भविष्य पर जारी दुविधा ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि भारतीय क्रिकेट के सबसे […]

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नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट में संन्यास किसी पहेली की तरह है जहां कुछ खिलाड़ियों ने सही समय यह फैसला किया जबकि कुछ इस बारे में फैसला लेने के लिए जूझते दिखे. महेंद्र सिंह धौनी के भविष्य पर जारी दुविधा ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक कब खेल को अलविदा कहेगा?

झारखंड के 38 साल के धौनी पिछले दो महीने से टीम के साथ नहीं हैं और नवंबर से पहले उनके टीम के साथ जुड़ने पर भी संशय बरकरार है. धौनी हाल में ही अपने घर पहुंचे हैं और अपने परिवार के साथ हैं. रांची पहुंचने के बाद धौनी अपनी नयी जीप गैंड चिरोकी से एयरपोर्ट से अपने घर पहुंचे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास को लेकर अब तक धौनी की ओर से कुछ नहीं कहा गया है.

बीसीसीआई के एक सूत्र ने ‘‘ इस बात की संभावना बेहद कम है कि धौनी बांग्लादेश के दौरे के लिए उपलब्ध होंगे. बीसीसीआई में हम सीनियर और ए टीम के क्रिकेटरों के लिए 45 दिन पहले मैचों (अंतररराष्ट्रीय और घरेलू) की तैयारी कर लेते है जिसमें प्रशिक्षण, डोपिंग रोधी कार्यक्रम से जुड़ी चीजें शामिल हैं.’ यह पता चला है कि मंगलवार से शुरू हो रही विजय हजारे राष्ट्रीय एकदिवसीय चैम्पियनशिप में धौनी झारखंड के लिए नहीं खेलेंगे.

दिग्गज सुनील गावस्कर ने हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा था, ‘‘ मुझे लगता है वह खुद ही यह फैसला कर लेंगे. हमें महेंद्र सिंह धौनी से आगे के बारे में सोचना चाहिए. कम से कम वह मेरी टीम का हिस्सा नहीं होंगे.’ गावस्कर को एक क्रिकेटर के तौर पर सीधे स्पष्ट तौर पर बोलने के लिए जाना जाता है. बात जब संन्यास की आती है तो गावस्कर ने यह फैसला बेहतरीन तरीके से किया. गावस्कर ने चिन्नास्वामी स्टेडियम की टर्न लेती पिच पर अपने अंतिम टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 96 रन बनाये थे. गावस्कर 1987 में 37 साल के थे लेकिन अपनी शानदार तकनीक के दम पर 1989 के पाकिस्तान दौरे तक खेल सकते थे. वह इस खेल को अलविदा कहने की कला को अच्छी तरह से जानते थे. उन्हें पता था कि अच्छे प्रदर्शन के बाद भी वह इस खेल का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं.

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