रणजी ट्रॉफी में बिहार क्रिकेट की वापसी पर संकट, गांगुली की अगुवाई वाली प्रशासकों की समिति ने जतायी आपत्ति

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Apr 2018 4:36 PM

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नयी दिल्ली : सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने प्रशासकों की समिति ( सीओए ) की अगले साल से बिहार को रणजी ट्रॉफी में शामिल करने की सिफारिश पर आपत्ति व्यक्त की है. कोलकाता में हुई बैठक के दौरान महाप्रबंधक ( क्रिकेट संचालन ) सबा करीम ने यह सिफारिश पेश की. […]

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नयी दिल्ली : सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने प्रशासकों की समिति ( सीओए ) की अगले साल से बिहार को रणजी ट्रॉफी में शामिल करने की सिफारिश पर आपत्ति व्यक्त की है.

कोलकाता में हुई बैठक के दौरान महाप्रबंधक ( क्रिकेट संचालन ) सबा करीम ने यह सिफारिश पेश की. बैठक में उपस्थित बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीम के बिहार को प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शामिल करने का सुझाव रखने के बाद समिति ने सर्वसम्मति ने महसूस किया कि इस संबंध में उचित प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिए.

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अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया , सबा करीम सीओए का पत्र लेकर आया था जिसमें तकनीकी समिति को बिहार को रणजी ट्रॉफी में शामिल करने के लिये हां करने का सुझाव दिया गया था. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हम बिहार को रणजी ट्रॉफी खेलने से नहीं रोक सकते हैं.

उन्होंने कहा , लेकिन एक अन्य सदस्य ने सबा से कहा कि इसकी क्या गारंटी है कि अगर हम बिहार को रणजी ट्रॉफी में खेलने की अनुमति देते हैं तो नगालैंड , मणिपुर और मेघालय अदालत नहीं जाएंगे. अभी तक बीसीसीआई ने नया संविधान स्वीकार नहीं किया है जिसमें लोढ़ा समिति के सुधार शामिल हैं.

इसलिए बिहार अब भी पूर्वोत्तर के राज्यों के तरह एसोसिएट सदस्य ही है. पूर्वोत्तर के राज्यों ने पिछले साल बीसीसीआई अंडर -19 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था और बोर्ड उन्हें सीधे रणजी ट्रॉफी में उतारने के बजाय धीरे-धीरे प्रणाली से जोड़ना चाहता है.

अधिकारी ने कहा , प्रत्येक एसोसिएट सदस्य को निश्चित प्रक्रिया से आगे बढ़ना होता है और सबा करीम को साफ तौर पर कह दिया गया कि तकनीकी समिति ऐसा नहीं सोचती कि बिहार के संबंध में कोई छूट दे देनी चाहिए. उसे जूनियर क्रिकेट अंडर -16, अंडर -19 और अंडर -22 में खेलना होगा और फिर रणजी ट्रॉफी में वापसी करनी होगी.

करीम ने समिति को समझाने की कोशिश की कि बिहार का मामला पूर्वोत्तर की तुलना में थोड़ा भिन्न है जहां क्रिकेट मुख्य खेल नहीं है और वहां आधारभूत ढांचे की भी कमी है. तकनीकी समिति ने करीम को दो विकल्प दिये या तो सीओए के निर्देशों के अनुसार बिहार को सीधे रणजी ट्रॉफी में प्रवेश दिया जाए और अन्य राज्यों से कानूनी कार्रवाई की अपेक्षा करें या फिर उन्हें जूनियर क्रिकेट में लाकर प्रक्रिया का अनुसरण करें.

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा , यह फैसला सीओए को करना है कि उन्हें कौन सा विकल्प व्यावहारिक लगता है. समिति को जो सही लगा उससे उसने सबा करीम को अवगत करा दिया है.

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