असमिया नव वर्ष की होगी शुरुआत, इस दिन मनाया जाएगा रोंगाली बिहू

Published by :Shaurya Punj
Published at :13 Apr 2026 1:21 PM (IST)
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Rongali Bihu 2026

रोंगाली बिहू 2026 (AI Generated Image)

Rongali Bihu 2026: रोंगाली बिहू असमिया नव वर्ष का प्रमुख पर्व है, जानें इसकी तिथि, महत्व, परंपराएं और कैसे मनाया जाता है यह उत्सव जो नई शुरुआत और खुशियों का प्रतीक है.

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Rongali Bihu 2026: रोंगाली बिहू, जिसे बोहाग बिहू भी कहा जाता है, असमिया नव वर्ष का प्रतीक है. यह पर्व 14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तभी नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है. यह त्योहार नई उम्मीदों, खुशियों और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश देता है.

यह केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी रखता है. इस दिन लोग प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं. साथ ही, पुराने विवादों को भुलाकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान जताने की परंपरा भी निभाई जाती है.

रोंगाली बिहू कब मनाया जाएगा?

भोगाली बिहू, जो सर्दियों की फसल का पर्व है, उससे अलग बोहाग बिहू वसंत ऋतु और नई कृषि बुवाई के मौसम का स्वागत करता है. वर्ष 2026 में यह त्योहार 14 अप्रैल से शुरू होकर 20 अप्रैल तक पूरे एक सप्ताह चलेगा. इस दौरान असम में ढोल की गूंज, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

कैसे मनाया जाता है बोहाग बिहू?

बोहाग बिहू के दिन लोग सुबह पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. नारियल, चावल और दूध का भोग लगाया जाता है. लोग अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं. इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं. बिहू नृत्य और गीत इस पर्व की खास पहचान हैं, जो पूरे वातावरण को आनंदमय बना देते हैं.

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रोंगाली बिहू पर मवेशियों की पूजा और कृषि परंपरा

रोंगाली बिहू के पहले दिन मवेशियों को विशेष रूप से नहलाया जाता है और उन्हें काली दाल, हल्दी, लौकी और बैंगन खिलाया जाता है. मान्यता है कि इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. फसल कटाई के बाद ईश्वर को अनाज अर्पित कर धन्यवाद दिया जाता है और आने वाली फसल की अच्छी उपज के लिए प्रार्थना की जाती है. यह पर्व प्रकृति और कृषि के प्रति सम्मान को दर्शाता है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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