वैशाख अमावस्या पर ऐसे करें पितृ तर्पण, जाने क्या है महत्व

Published by :Shaurya Punj
Published at :13 Apr 2026 2:35 PM (IST)
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Vaishakh Amavasya 2026

वैशाख अमावस्या पर पितृ तर्पण का महत्व

Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या पर विधिपूर्वक पितृ तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

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Vaishakh Amavasya 2026: भगवान विष्णु को समर्पित वैशाख मास में आने वाली अमावस्या तिथि का सनातन धर्म में विशेष स्थान है. यह दिन स्नान, तर्पण, पूजा-पाठ और दान के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. मान्यता है कि इस पावन अवसर पर श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्य साधक को कई गुना पुण्य प्रदान करते हैं. वैशाख का महीना स्वयं तप, सेवा और दान के लिए जाना जाता है, इसलिए इस माह की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है. इस दिन लक्ष्मी नारायण की कृपा प्राप्त करने, पितरों की आत्मा की शांति और जीवन में सुख-समृद्धि पाने का विशेष योग बनता है.

वैशाख अमावस्या 2026 तिथि और समय

साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. काशी पंचांग के अनुसार यह तिथि 16 अप्रैल की रात 8 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होकर 17 अप्रैल की शाम 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगी. चूंकि उदया तिथि 17 अप्रैल को प्राप्त हो रही है, इसलिए व्रत, स्नान, तर्पण और दान जैसे सभी शुभ कार्य इसी दिन करना उत्तम रहेगा.

तर्पण का महत्व और लाभ

वैशाख अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है. इस दिन विधिपूर्वक तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया तर्पण कई गुना फलदायी होता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.

तर्पण की तैयारी कैसे करें

तर्पण करने से पहले प्रातःकाल स्नान करना आवश्यक है, और यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करना अधिक शुभ माना जाता है. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ रखें. तर्पण के लिए तांबे का पात्र, काला तिल, कुशा (दर्भ), जल और पुष्प की व्यवस्था करें. इसके साथ ही अपने पितरों का ध्यान करते हुए मन को शांत और एकाग्र रखें.

तर्पण करने की विधि

तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है. हाथ में जल, काला तिल और कुशा लेकर अपने पूर्वजों का स्मरण करें और तीन बार जल अर्पित करें. हर बार “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र का उच्चारण करें.

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ध्यान रखने योग्य बातें

तर्पण करते समय श्रद्धा, शुद्धता और सकारात्मक भाव बनाए रखना आवश्यक है. इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना भी शुभ फल प्रदान करता है. साथ ही, पितरों को याद करते हुए मन में किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार न रखें, ताकि उनका आशीर्वाद जीवन में बना रहे.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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