Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है. उत्तरायण काल को शुभता, सकारात्मकता और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. इस समय किया गया स्नान-दान, धार्मिक कार्य और अनुष्ठान विशेष फल देता है. आइए जानते हैं इस दिन सूर्य देव की पूजा का धार्मिक महत्व विस्तार से.
मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में सूर्य देव को ऊर्जा, स्वास्थ्य, आत्मबल और जीवन के आधार के रूप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें विशेष रूप से लाभकारी होती हैं, जिससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं. इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने से रोग, नकारात्मकता और मानसिक तनाव दूर होता है. साथ ही आत्मबल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है.
मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव मकर संक्रांति के दिन अपने पुत्र शनिदेव के घर यानी मकर राशि में प्रवेश करते हैं. सूर्य देव और शनिदेव के बीच हमेशा से तनाव रहा है. इसका कारण सूर्य देव द्वारा बार-बार शनिदेव और उनकी माता छाया को कष्ट देना माना जाता है. सूर्य देव ने शनिदेव के निवास स्थल कुंभ को जला दिया था. बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, तब इस दिन भगवान सूर्य ने शनिदेव को नया घर मकर राशि दी और रिश्तों में सुधार का प्रयास किया. यही कारण है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से पिता-पुत्र संबंधों में मधुरता आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
सूर्य देव को ऐसे दें अर्घ्य
• सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
• एक तांबे का लोटा लें, जिसमें जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य दें.
• साथ ही “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें.
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