महाशिवरात्रि पर बेलपत्र, धतूरा और भांग क्यों चढ़ाए जाते हैं? जानें धार्मिक कारण
Published by : Neha Kumari Updated At : 06 Feb 2026 2:58 PM
शिव जी को बेलपत्र, भांग, धतूरा और भांग चढ़ाना
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को धतूरा, भांग और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जहां अन्य देवी-देवताओं की पूजा में सुकोमल फूल अर्पित किए जाते हैं, वहीं भगवान शिव को ये विशेष चीजें क्यों चढ़ाई जाती हैं? आइए जानते हैं इन सामग्रियों के अर्पण के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव है. इस दिन भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-पाठ, व्रत, दान और मंत्रोच्चारण करते हैं. साथ ही तरह-तरह की चीजें अर्पित करते हैं. महादेव को इस दिन अर्पित की जाने वाली वस्तुओं में बेलपत्र, धतूरा और भांग को सबसे खास माना जाता है.
1. बेलपत्र
भगवान शिव की पूजा में तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित किया जाता है. कहा जाता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शंकर के तीन नेत्रों का प्रतीक हैं. साथ ही इसे त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यता है कि बेलपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं.
बेलपत्र के अर्पण से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी बहुत प्रचलित है. कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विषपान किया था, तो उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगा था. बेलपत्र में शीतलता के गुण होते हैं, इसलिए उस समय उनके शरीर की गर्मी कम करने के लिए उन्हें बेलपत्र अर्पित किया गया था.
2. धतूरा
धतूरा एक विषैला फल है, जिसे कोई नहीं खाता और न ही इसे आमतौर पर किसी अन्य देवता को चढ़ाया जाता है. लेकिन भगवान शिव धतूरे के फल और फूल दोनों को प्रसन्नता से स्वीकार करते हैं. धतूरा अर्पित करना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि हम अपने भीतर की कटुता, अहंकार, ईर्ष्या और नफरत जैसी ‘जहरीली’ भावनाओं को भगवान शिव के चरणों में समर्पित कर रहे हैं.
3. भांग
भांग को भगवान शिव के प्रसाद के रूप में देखा जाता है, हालांकि इसके पीछे मुख्य उद्देश्य औषधीय और ध्यान से जुड़ा माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकला विष जब भगवान शिव ने ग्रहण किया, तो उनका शरीर तपने लगा था. तब भांग और अन्य जड़ी-बूटियां उन्हें दी गईं, ताकि उनका मस्तिष्क शांत रहे.
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