Vastu Tips of Hanumanji Photo: श्रीराम भक्त हनुमान जी साक्षात जाग्रत देव माने जाते हैं. उनकी भक्ति जितनी सरल दिखती है, उतनी ही अनुशासन और पवित्रता की मांग भी करती है. हनुमान जी की उपासना में उत्तम चरित्र, संयम और शुद्ध आचरण आवश्यक है, अन्यथा इसका अपेक्षित फल नहीं मिलता.
हनुमान भक्ति का प्रभाव
कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की शरण में आता है, उसके जीवन से संकट स्वतः दूर होने लगते हैं. हनुमान भक्ति से व्यक्ति को साहस, शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है. विद्वानों का मानना है कि जिसने एक बार हनुमान भक्ति का रस चख लिया, वह जीवन की बाज़ी अंततः जीत ही जाता है. उसकी हार भी किसी न किसी रूप में जीत में बदल जाती है.
हनुमान जी के विविध स्वरूप
हनुमान जी के अनेक स्वरूप प्रचलित हैं—पर्वत उठाते हुए, उड़ते हुए, पंचमुखी, रामभक्ति में लीन, गदा धारण किए, लंका दहन करते हुए, सीता वाटिका में अंगूठी देते हुए, राम-दरबार में नतमस्तक, बाल हनुमान, ध्यानस्थ हनुमान, विशाल रूप दिखाते हुए या आशीर्वाद देते हुए. हर स्वरूप का अपना आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव होता है.
किस दिशा में लगाएं हनुमान जी का चित्र
वास्तु शास्त्र के अनुसार हनुमान जी का चित्र दक्षिण दिशा की ओर मुख किए होना चाहिए. विशेष रूप से लाल रंग में, बैठी हुई मुद्रा वाला चित्र शुभ माना जाता है. दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक शक्तियां हनुमान जी के प्रभाव से निष्क्रिय हो जाती हैं, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.
शयनकक्ष में क्यों न रखें हनुमान चित्र
हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं, इसलिए उनका चित्र शयनकक्ष में रखना उचित नहीं माना जाता. उन्हें घर के मंदिर, पूजा स्थल या किसी पवित्र स्थान पर स्थापित करना श्रेष्ठ फलदायी होता है.
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नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के लिए
यदि घर में नकारात्मक ऊर्जा, भय या अशांति का अनुभव हो, तो पंचमुखी हनुमान जी का चित्र मुख्य द्वार के ऊपर या ऐसी जगह लगाएँ जहाँ वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे. यह घर को भूत-प्रेत और बुरी शक्तियों से सुरक्षित रखता है.
पंचमुखी हनुमान का विशेष महत्व
वास्तु के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र घर में होने से बाधाएं दूर होती हैं और धन-समृद्धि में वृद्धि होती है. विशेषकर जल स्रोत दोष की स्थिति में पंचमुखी हनुमान का चित्र अत्यंत लाभकारी माना गया है.
बैठक कक्ष में कौन-सा चित्र शुभ
बैठक रूम में श्रीराम दरबार का चित्र लगाना श्रेष्ठ होता है, जिसमें हनुमान जी प्रभु श्रीराम के चरणों में बैठे हों. इसके अलावा पर्वत उठाते हुए, उड़ते हुए या श्रीराम भजन करते हनुमान जी का चित्र भी लगाया जा सकता है—लेकिन एक ही चित्र पर्याप्त होता है.
अलग-अलग चित्रों का प्रभाव
- पर्वत उठाते हनुमान: साहस, बल और आत्मविश्वास बढ़ता है
- उड़ते हनुमान: उन्नति और सफलता में गति आती है
- श्रीराम भजन करते हनुमान: भक्ति, विश्वास और मानसिक स्थिरता मिलती है
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है.

