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Terhavin Ka Khana: मृत्युभोज में किन लोगों को भोजन करने से करना चाहिए परहेज

Updated at : 19 Jun 2025 10:38 PM (IST)
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Tehrvi Ka Khana: Who should not eat Funeral Feast

Tehrvi Ka Khana

Terhavin Ka Khana: हिंदू परंपराओं में मृत्युभोज (तेरहवीं) एक धार्मिक क्रिया है, जिसका उद्देश्य पितरों की आत्मा की शांति हेतु कर्म करना होता है. हालांकि कुछ विशेष व्यक्तियों को इस भोज से दूर रहना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में इसे अशुभ या ऊर्जात्मक रूप से संवेदनशील माना गया है.

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Terhavin Ka Khana: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध, पिंडदान और मृत्युभोज जैसे संस्कारों का आयोजन किया जाता है. मृत्युभोज का उद्देश्य पितरों की आत्मा को तृप्त करना और उन्हें मोक्ष की ओर अग्रसर करना होता है. यह पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक भावना से जुड़ा होता है, न कि किसी सामाजिक समारोह की तरह. ऐसे में यह जानना बेहद आवश्यक है कि किन व्यक्तियों को मृत्युभोज में भोजन करने से परहेज करना चाहिए.

गर्भवती महिलाएं

धार्मिक मान्यता है कि गर्भवती महिलाओं को मृत्युभोज में भाग नहीं लेना चाहिए. यह समय उनके और गर्भस्थ शिशु के लिए संवेदनशील होता है, और कहा जाता है कि ऐसे अवसरों की नकारात्मक ऊर्जा भ्रूण पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है.

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ब्राह्मण, संत और तपस्वी

जो व्यक्ति संयमित जीवन जीते हैं, जैसे कि ब्राह्मण, संत, या तपस्वी, उन्हें ऐसे शोकपूर्ण आयोजनों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. वे सांसारिक कर्मों से निवृत्त होते हैं और मृत्युभोज जैसे कर्मकांडों से स्वयं को अलग रखते हैं.

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बीमार या दुर्बल व्यक्ति

शारीरिक रूप से अस्वस्थ या कमजोर लोगों को भी मृत्युभोज में भोजन नहीं करना चाहिए. वहां का वातावरण स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता और यह उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है.

नवविवाहित स्त्री-पुरुष

नवविवाह एक पवित्र और शुभ संस्कार होता है, जबकि मृत्युभोज को अशुभ कर्मकांडों में गिना जाता है. इसलिए नवविवाहित दंपतियों को ऐसे आयोजनों से दूर रहना चाहिए ताकि उनके जीवन की शुभ शुरुआत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

जिनके घर में हाल ही में मृत्यु हुई हो

अगर किसी व्यक्ति के घर में हाल ही में मृत्यु हुई हो और वे सूतक (अशौच) काल में हों, तो उन्हें दूसरे के मृत्युभोज में शामिल नहीं होना चाहिए. शास्त्रों में यह वर्जित बताया गया है.

मृत्युभोज जैसे आयोजन अत्यंत पवित्र होते हैं, लेकिन उनमें भागीदारी के लिए कुछ धार्मिक नियमों और शुचिता का पालन आवश्यक है. उपरोक्त व्यक्तियों को मृत्युभोज में सम्मिलित होने या भोजन ग्रहण करने से बचना चाहिए, ताकि धर्म सम्मत परंपराएं ससम्मान निभाई जा सकें.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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