सपने में आए भगवान तारकनाथ और बदल गया इतिहास! जानिए हुगली के तारकेश्वर महादेव की पौराणिक कथा

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तारकेश्वर महादेव मंदिर

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित तारकेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिना जाता है. कोलकाता से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित इस धाम में सावन और महाशिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. आज तारकेश्वर रेलवे स्टेशन भी इसी मंदिर के नाम पर जाना जाता है और देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं.

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Tarakeshwar Mahadev Temple: पश्चिम बंगाल में भगवान शिव के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हुगली जिले में स्थित प्राचीन तारकेश्वर महादेव मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. खासकर कांवड़िये दूर-दूर से बाबा तारकनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए तारकेश्वर धाम की यात्रा करते हैं. कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए यह प्रमुख आस्था केंद्र है.

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सावन में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

सावन के दौरान कोलकाता के नीमतला घाट स्थित भूतनाथ मंदिर, उत्तर 24 परगना के बारह महादेव, मध्य कोलकाता के काशी विश्वनाथ और जबरेश्वर महादेव, दक्षिण कोलकाता के भू-कैलाश तथा बर्दवान के 108 महादेव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ रहती है. हालांकि तारकेश्वर धाम में कांवड़ियों की विशेष आस्था देखने को मिलती है. यहां सावन भर शिवभक्त बाबा तारकनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.

गाय के दुग्धाभिषेक से जुड़ी है कथा

तारकेश्वर मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है. मान्यता के अनुसार तारकेश्वर से करीब तीन मील दूर रामनगर में राजा विष्णुदास के भाई भारमल का महल था. उनके पास कपिला नाम की गाय थी, जिसे मुकुंद नाम का ग्वाला जंगल में चराने ले जाता था. कुछ समय बाद गाय का दूध कम होने लगा. कारण जानने के लिए ग्वाले ने उसका पीछा किया.

एक दिन उसने जंगल में एक सुंदर शिवलिंग रूपी पत्थर देखा. मान्यता है कि कपिला उसी शिवलिंग पर स्वतः दूध अर्पित कर रही थी. ग्वाले ने यह बात भारमल को बताई. भारमल ने स्वयं वहां पहुंचकर यह अद्भुत दृश्य देखा.


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स्वप्न में मिले भगवान तारकनाथ

भारमल ने उस शिवलिंग को वहां से हटाकर महल ले जाने का प्रयास किया. खुदाई काफी गहराई तक की गई, लेकिन शिवलिंग का अंत नहीं मिला. उसी रात भगवान तारकनाथ ने भारमल को स्वप्न में दर्शन देकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया. इसके बाद वहां मंदिर का निर्माण कराया गया और यह स्थान तारकेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

कैसे पहुंचें तारकेश्वर धाम?

तारकेश्वर रेलवे स्टेशन हुगली जिले में स्थित है और इसका नाम इसी प्रसिद्ध मंदिर के कारण पड़ा. कोलकाता से लगभग 60 किलोमीटर दूर यह धाम भगवान शिव के स्वरूप तारकनाथ को समर्पित है. सावन और शिवरात्रि में यहां लाखों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.


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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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