Surya Arghya Benefits: उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में हजारों वर्षों से चली आ रही है. आज भी करोड़ों लोग प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. यह परंपरा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहन ज्योतिषीय, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं.
सूर्य और ज्योतिष शास्त्र का संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मा, स्वास्थ्य, आत्मबल और मान-सम्मान का कारक ग्रह है. कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होने पर व्यक्ति को आत्मविश्वास की कमी, स्वास्थ्य समस्याएं और करियर में रुकावटें झेलनी पड़ती हैं. ऐसे में उगते सूर्य को नियमित रूप से जल अर्पित करने से सूर्य मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
धार्मिक ग्रंथों में सूर्य का महत्व
स्कंद पुराण और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों में सूर्य और चंद्रमा को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है. सूर्य की किरणों से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है, फसलें उगती हैं और प्रकृति में संतुलन बना रहता है. इसलिए प्रतिदिन सुबह सूर्य को जल चढ़ाना कृतज्ञता, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना गया है.
आयुर्वेद और जल चिकित्सा का दृष्टिकोण
आयुर्वेद और जल चिकित्सा के अनुसार सुबह के समय सूर्य की किरणें अत्यंत लाभकारी होती हैं. सूर्य को जल अर्पित करते समय यदि सिर के ऊपर तांबे या पीतल के पात्र से जल चढ़ाया जाए और दृष्टि जलधारा के बीच रखी जाए, तो जल से छनकर सूर्य की किरणें आज्ञा चक्र पर पड़ती हैं, जिससे आंखों की रोशनी और मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है.
आधुनिक विज्ञान क्या कहता है
आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि प्रातःकालीन सूर्य की किरणों में विटामिन-D भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों, प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है. जब सूर्य की किरणें जल की धार से होकर शरीर पर पड़ती हैं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव ऊर्जा और स्फूर्ति के रूप में महसूस होता है.
शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव
उगते सूर्य को जल अर्पित करने से शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इससे मन शांत रहता है, आत्मबल मजबूत होता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है.
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परंपरा में छिपा विज्ञान
इस प्रकार उगते हुए सूर्य को जल देना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक संतुलन से जुड़ा वैज्ञानिक उपाय भी है. हमारी प्राचीन परंपराओं में गहन विज्ञान छिपा हुआ है, जिसे समझने की आवश्यकता है. भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक होने के साथ-साथ वैज्ञानिक भी है.

