Shiv Mantra: भगवान शिव को महादेव कहा गया है, क्योंकि वे केवल संहार के प्रतीक नहीं, बल्कि चेतना, नवसृजन और करुणा के अधिष्ठाता हैं. शिव भक्ति व्यक्ति को बाहरी कष्टों से ही नहीं, बल्कि भीतर चल रहे द्वंद्व, भय और असंतुलन से भी मुक्त करने की क्षमता रखती है. शास्त्रों में वर्णित शिव मंत्रों का नियमित जाप मन, कर्म और भाग्य—तीनों स्तरों पर गहरा प्रभाव डालता है. आज 5 जनवरी 2026, नए साल का पहला सोमवार है. यह दिन शिव साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. यदि आज श्रद्धा से इन मंत्रों में से किसी एक का भी जाप किया जाए, तो वर्ष की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और शिव कृपा के साथ होती है.
महामृत्युंजय मंत्र — संकटों से सुरक्षा का कवच
यह मंत्र भय, रोग और अनिश्चितता के समय संबल देता है. माना जाता है कि इसके जाप से मानसिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है.
पंचाक्षर मंत्र — आत्मशुद्धि और स्थिरता का सूत्र
“ॐ नमः शिवाय” शिव भक्ति का मूल मंत्र है. इसका नियमित जप मन को शांत करता है, नकारात्मक विचारों को दूर करता है और भीतर छिपी चेतना को जागृत करता है.
शिव गायत्री मंत्र — विवेक और सही निर्णय की प्रेरणा
यह मंत्र बुद्धि को तेज करता है और जीवन में सही दिशा चुनने की शक्ति देता है. साधक में आत्मविश्वास और आत्मिक जागृति का विकास होता है.
रुद्र मंत्र — नकारात्मकता से मुक्ति का साधन
इस मंत्र के जाप से मानसिक बोझ, भय और बाधाओं में कमी आती है. यह भीतर और बाहर की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने में सहायक माना गया है.
शिव–शक्ति एकत्व मंत्र — संतुलन और पूर्णता का अनुभव
यह मंत्र जीवन में पुरुष और प्रकृति, स्थिरता और शक्ति के संतुलन का प्रतीक है. इससे मानसिक और भावनात्मक स्थिरता मिलती है.
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नियमित शिव मंत्र साधना से जीवन में शांति, साहस और स्थिरता आती है. महादेव की कृपा से असंभव भी संभव बन सकता है.
हर सोमवार—ॐ नमः शिवाय

