शीतला माता को अर्पित न करें ये चीजें, हो सकता है बुरा प्रभाव

Sheetala Asatami 2025 not offer these things to sheetala mata
Sheetala Asatami 2025: शीतला अष्टमी के दिन शरीर को ठंडक देने वाले भोजन जैसे दाल, भात, पूड़ी, दही की लस्सी और हरी सब्जियाँ तैयार की जाती हैं, जिन्हें अगले दिन ठंडी और बासी के रूप में सेवन किया जाता है.इसके बाद शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है.आइए जानते हैं कि इस दिन शीतला माता को किन चीजों को अर्पित करने से बचना चाहिए.
Sheetala Asatami 2025:शीतला माता को हिंदू धर्म में रोगों को समाप्त करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है, विशेषकर गर्मियों के दौरान. यह विश्वास किया जाता है कि माता की कृपा से चेचक, त्वचा संबंधी रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. शीतला माता को ठंडा भोजन और विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं, जबकि कुछ वस्तुओं को माता को चढ़ाने से मना किया गया है.
ताजा गरम भोजन
शीतला माता की पूजा में बासी और ठंडा भोजन अर्पित करने की परंपरा है. पूजा के दिन ताजा और गर्म भोजन बनाना और उसे माता को अर्पित करना वर्जित है. इसलिए, माता को गरम पूड़ी, पराठा, चावल, दाल या अन्य ताजा पकवान नहीं चढ़ाए जाते. इसके स्थान पर, बासी रोटियां, दही, चिउड़ा, मीठे व्यंजन और ठंडे पदार्थ अर्पित किए जाते हैं.
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तामसिक भोजन
शीतला माता की पूजा में केवल सात्विक भोजन का उपयोग किया जाता है. माता को मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज और मदिरा अर्पित करना निषिद्ध है. यह पूजा पूरी तरह से शुद्धता और सात्विकता के साथ की जाती है, इसलिए केवल हल्के और पवित्र खाद्य पदार्थ ही माता को समर्पित किए जाते हैं.
तुलसी पत्ता
हालांकि तुलसी पत्ता को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र माना जाता है और इसे भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है, लेकिन शीतला माता को तुलसी के पत्ते चढ़ाने की अनुमति नहीं है. ऐसा माना जाता है कि तुलसी गर्म होती है, जबकि माता को ठंडी चीजें पसंद होती हैं.
गरम दूध या चाय
शीतला माता को ठंडे खाद्य पदार्थ अर्पित करने की परंपरा है, इसलिए गरम दूध, चाय या कॉफी का चढ़ाना वर्जित है. माता को ठंडा दूध, दही और शीतल जल अर्पित किया जाता है.
लोहे या स्टील के बर्तन में भोग
शीतला माता की पूजा में मिट्टी, कांसे या तांबे के बर्तनों का उपयोग करना शुभ माना जाता है. लोहे या स्टील के बर्तनों में भोग अर्पित करने से माता नाराज हो सकती हैं.
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By Shaurya Punj
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