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Sade Sati: शनि की साढ़े साती, 7.5 साल की परीक्षा, क्या वाकई लाती है मुश्किलें?

Updated at : 02 Apr 2025 10:54 AM (IST)
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Shani Sade Sati

Shani Sade Sati

Shani Sade Sati: ज्योतिष में शनि की साढ़े साती को चिंता का विषय माना जाता है. बहुत से लोगों का मानना ​​है कि यह बहुत संघर्ष और कठिनाइयाँ लेकर आती है. लेकिन यह कितना सच है? आइए विस्तार से जानें.

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Shani Sade Sati: जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्र राशि और उससे संबंधित अगली तथा पिछली राशियों में भ्रमण करता है, तो इसे साढ़े साती कहा जाता है. यह प्रक्रिया तीन चरणों में विभाजित होती है: पहला चरण: जब शनि, चंद्र राशि से एक राशि पहले प्रवेश करता है. दूसरा चरण: जब शनि, चंद्र राशि में आता है. तीसरा चरण: जब शनि, चंद्र राशि से अगली राशि में प्रवेश करता है. प्रत्येक चरण लगभग 2.5 वर्षों तक चलता है, जिससे कुल मिलाकर 7.5 वर्षों तक इसका प्रभाव बना रहता है. यह अवधि जीवन में कई बार आती है.

क्या साढ़े साती हमेशा नकारात्मक होती है?

नहीं! साढ़े साती के बारे में कई भ्रांतिया और डर फैले हुए हैं. यह समय पूरी तरह से व्यक्ति के कर्मों और कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है. कुछ लोगों के लिए यह समय कठिनाइयों से भरा हो सकता है, जबकि दूसरों के लिए यह उन्नति का अवसर भी बन सकता है.

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शनि साढ़े साती के संभावित प्रभाव

रुकावटें और संघर्ष

यह अवधि कई कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने का संकेत देती है. करियर, परिवार और व्यक्तिगत जीवन में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

स्वास्थ्य समस्याएं

इस समय विशेष रूप से पैरों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इसके साथ ही, मानसिक तनाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे भी उत्पन्न हो सकते हैं.

रिश्तों में तनाव

इस अवधि में रिश्तों में गलतफहमियों का बढ़ना संभव है. प्रेम संबंधों में दरार आ सकती है, और कभी-कभी यह स्थिति ब्रेकअप या तलाक की ओर भी बढ़ सकती है.

आर्थिक संकट

साढ़े साती के समय में कई व्यक्तियों को नौकरी में अस्थिरता और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. इस अवधि में किसी को उधार देने से बचना चाहिए, क्योंकि धन की वापसी में कठिनाई हो सकती है.

शनि साढ़े साती के प्रभाव को कम करने के सरल उपाय

  • हनुमान चालीसा का पाठ करें – प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि के नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है.
  • शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं – सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की शांति होती है.
  • पक्षियों, चींटियों और कौवों को आहार प्रदान करें – इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
  • अंधों को अनाज और वस्त्र दान करें – यह शनि के दोष को कम करने का एक प्रभावी उपाय है.
  • प्रत्येक शनिवार को 108 बार शनि मंत्र का जाप करें – “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का उच्चारण करना लाभकारी सिद्ध होता है.
  • यदि साढ़े साती को सही ढंग से प्रबंधित किया जाए, तो यह सुधार और आत्मविकास का अवसर भी बन सकता है. यह कर्मों में सुधार और जीवन को संतुलित करने का संकेत देता है.

जन्मकुंडली, वास्तु, तथा व्रत त्यौहार से सम्बंधित किसी भी तरह से जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबर पर फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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