Shakambhari Mata: शाकंभरी माता की कृपा, जीवनदायिनी शक्ति और शाक-सब्जियों से समृद्धि का प्रतीक

Published by : Shaurya Punj Updated At : 05 Jan 2026 10:42 AM

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मां शाकंभरी की पूजा

Shakambhari Mata: मां शाकम्भरी, हरितिमा और जीवनदायिनी शक्ति की प्रतीक हैं. पौष पूर्णिमा पर उनका प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है. शाक-सब्जियों और कंदमूल से भोग, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देते हैं.

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– डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

Shakambhari Mata: आदि-अनादि काल से भारतीय धार्मिक जगत् में देवताओं से अधिक देवी मां की महिमा, कृपा और महत्ता बनी हुई है, जिनमें मां शाकम्भरी भी हैं. मां शाकम्भरी को शाकुंभरी, शाकंभरी और शताक्षी भी पुकारा जाता है.

प्राकट्योत्सव और पुराणिक उल्लेख

पौष माह की पूर्णिमा तिथि मां शाकम्भरी का प्राकट्योत्सवव है. मार्कंडेय पुराण अंतर्गत श्री दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि देवी शाकम्भरी आदिशक्ति दुर्गा के अवतारों में से एक हैं. श्रीमद् देवीभागवत ने भी इनकी कथा आती है. श्री दुर्गा सप्तशती में माताजी स्पष्ट रूप से कहती हैं कि जब पृथ्वी पर सौ वर्षों के लिए वर्षा रुक जायेगी और पानी का सर्वथा अभाव हो जायेगा,तब मुनियों के स्तवन करने पर मैं पृथ्वी पर अयोनिजारूप में प्रकट होकर सौ नेत्रों से मुनियों को देखूंगी, तब भक्त ‘शताक्षी’ के नाम से मेरा पूजन-अर्चन करेंगे. उस समय में शरीर से उत्पन्न हुए शाकों द्वारा समस्त संसार का भरण-पोषण करूंगी. जब तक वर्षा नहीं होगी तब तक शाक ही सब प्राणियों की रक्षा करेंगे. ऐसा करने के कारण पृथ्वी पर मेरी शाकम्भरी के नाम से ख्याति होगी और उसी अवतार से मैं महादैत्य दुर्गम का वध कर महामाया दुर्गा का रूप प्राप्त करूंगी.

दैत्य दुर्गम और पृथ्वी संकट

प्रचलित कथा के अनुसार, हिरण्याक्ष के कुल में उत्पन्न हुए दुर्गम नामक दैत्य ने एक बार कठोर तप के बल पर ब्रह्मा आदि देवताओं को प्रसन्न कर संपूर्ण वेद और शास्त्रों पर अधिकार कर लिया तथा देवताओं को इनसे वंचित भी कर दिया, जिससे वेद पाठ एवं यज्ञ परंपरा भूलोक से लुप्त होने लगी. दैत्यों का प्रभाव दिनों-दिन बढ़ने लगा. फलस्वरूप वर्षों तक धरती पर वर्षा नहीं हुई. फलस्वरूप संपूर्ण वनस्पति नष्ट हो गयी. तब देवताओं में मां भगवती से संपूर्ण जगत् को संकट से की रक्षा करने का अनुनय-विनय किया.

मां शाकम्भरी का करुणामय प्रकट्य

संपूर्ण भू-लोक को कष्ट से उबारने के लिए देवी धरा पर प्रकट हुईं. जल और वनस्पति विहीन धरती पर क्षुधा से आकुल प्राणियों को देखकर मां की अंतः करुणा जाग उठी और मां की नेत्रों से अश्रुधार बह निकली. नौ दिवस और नौ रात्रि अनवरत बहती धारा से संपूर्ण पृथ्वी तृप्त हो गयी. संकट हरणी माता की शक्ति से धरा पर वनस्पति आदि पुनः उत्पन्न हुई. साग-सब्जी, फल-फूल, औषधि, कंद मूल, जडी – बूटी आदि को उत्पन्न कर प्राणियों को जीवन प्रदान करने वाली शक्ति को देवताओं और भक्तों ने मां शाकम्भरी कहा.

पौष पूर्णिमा पर जयंती

आज भी माता रानी को उनके विशेष पूजन के अवसर पर विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियां, बेलपत्र, कंदमूल और फल-फलाहार आदि भोग लगाने की परंपरा है. विवरण है कि माता शाकंभरी देवी भूमंडल पर पौष पूर्णिमा के दिन प्रकट हुई थीं, इसीलिए पौष पूर्णिमा पर हर वर्ष मां शाकम्भरी जयंती हर्षोल्लास के साथ मनायी जाती है. ऐसे नवरात्र की पवित्र-पुनीत अवधि में भी मां शाकम्भरी की विशेष पूजन-आराधन की जाती है.

मां शाकम्भरी और हरितिमा

धर्मज्ञों की राय में हरीतिमा लिए पृथ्वी और साग सब्जियों का मूल रंग हरा है, इसीलिए मां को हरा रंग अतिशय प्रिय है. ऐसे तो पूरे देश मे माता शाकम्भरी का पूजन स्थान विद्यमान है, पर इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध सहारनपुर के शिवालिक क्षेत्र में अवस्थित मां शाकम्भरी के तीर्थ का विशेष महत्व है. साथ ही राजस्थान के मरू प्रदेश में अवस्थित सांभर में भी मां का एक पौराणिक तीर्थ विराजमान है. उत्तर भारत में नौ देवियों की यात्रा में मां शाकम्भरी देवी की भी गणना की जाती है.

जीवनदायिनी आहार और मां की कृपा

आज भले ही लोगों में मांसाहार की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन जीवनदायिनी आहार तत्वों मे साग-सब्जियों का अमूल्य स्थान है और यह मां शाकम्भरी की ही कृपा है कि साग-सब्जियों से अपना देश प्रारंभिक काल से ही सर्वसमृद्ध रहा है, जो तुष्टि पुष्टिदायक आहारों में सबसे उपयुक्त है और स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम भी.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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