Shakambhari Mata: शाकंभरी माता की कृपा, जीवनदायिनी शक्ति और शाक-सब्जियों से समृद्धि का प्रतीक

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Shakambhari Mata: शाकंभरी माता की कृपा, जीवनदायिनी शक्ति और शाक-सब्जियों से समृद्धि का प्रतीक

Shakambhari Mata: मां शाकम्भरी, हरितिमा और जीवनदायिनी शक्ति की प्रतीक हैं. पौष पूर्णिमा पर उनका प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है. शाक-सब्जियों और कंदमूल से भोग, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देते हैं.

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– डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

Shakambhari Mata: आदि-अनादि काल से भारतीय धार्मिक जगत् में देवताओं से अधिक देवी मां की महिमा, कृपा और महत्ता बनी हुई है, जिनमें मां शाकम्भरी भी हैं. मां शाकम्भरी को शाकुंभरी, शाकंभरी और शताक्षी भी पुकारा जाता है.

प्राकट्योत्सव और पुराणिक उल्लेख

पौष माह की पूर्णिमा तिथि मां शाकम्भरी का प्राकट्योत्सवव है. मार्कंडेय पुराण अंतर्गत श्री दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि देवी शाकम्भरी आदिशक्ति दुर्गा के अवतारों में से एक हैं. श्रीमद् देवीभागवत ने भी इनकी कथा आती है. श्री दुर्गा सप्तशती में माताजी स्पष्ट रूप से कहती हैं कि जब पृथ्वी पर सौ वर्षों के लिए वर्षा रुक जायेगी और पानी का सर्वथा अभाव हो जायेगा,तब मुनियों के स्तवन करने पर मैं पृथ्वी पर अयोनिजारूप में प्रकट होकर सौ नेत्रों से मुनियों को देखूंगी, तब भक्त ‘शताक्षी’ के नाम से मेरा पूजन-अर्चन करेंगे. उस समय में शरीर से उत्पन्न हुए शाकों द्वारा समस्त संसार का भरण-पोषण करूंगी. जब तक वर्षा नहीं होगी तब तक शाक ही सब प्राणियों की रक्षा करेंगे. ऐसा करने के कारण पृथ्वी पर मेरी शाकम्भरी के नाम से ख्याति होगी और उसी अवतार से मैं महादैत्य दुर्गम का वध कर महामाया दुर्गा का रूप प्राप्त करूंगी.

दैत्य दुर्गम और पृथ्वी संकट

प्रचलित कथा के अनुसार, हिरण्याक्ष के कुल में उत्पन्न हुए दुर्गम नामक दैत्य ने एक बार कठोर तप के बल पर ब्रह्मा आदि देवताओं को प्रसन्न कर संपूर्ण वेद और शास्त्रों पर अधिकार कर लिया तथा देवताओं को इनसे वंचित भी कर दिया, जिससे वेद पाठ एवं यज्ञ परंपरा भूलोक से लुप्त होने लगी. दैत्यों का प्रभाव दिनों-दिन बढ़ने लगा. फलस्वरूप वर्षों तक धरती पर वर्षा नहीं हुई. फलस्वरूप संपूर्ण वनस्पति नष्ट हो गयी. तब देवताओं में मां भगवती से संपूर्ण जगत् को संकट से की रक्षा करने का अनुनय-विनय किया.

मां शाकम्भरी का करुणामय प्रकट्य

संपूर्ण भू-लोक को कष्ट से उबारने के लिए देवी धरा पर प्रकट हुईं. जल और वनस्पति विहीन धरती पर क्षुधा से आकुल प्राणियों को देखकर मां की अंतः करुणा जाग उठी और मां की नेत्रों से अश्रुधार बह निकली. नौ दिवस और नौ रात्रि अनवरत बहती धारा से संपूर्ण पृथ्वी तृप्त हो गयी. संकट हरणी माता की शक्ति से धरा पर वनस्पति आदि पुनः उत्पन्न हुई. साग-सब्जी, फल-फूल, औषधि, कंद मूल, जडी – बूटी आदि को उत्पन्न कर प्राणियों को जीवन प्रदान करने वाली शक्ति को देवताओं और भक्तों ने मां शाकम्भरी कहा.

पौष पूर्णिमा पर जयंती

आज भी माता रानी को उनके विशेष पूजन के अवसर पर विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियां, बेलपत्र, कंदमूल और फल-फलाहार आदि भोग लगाने की परंपरा है. विवरण है कि माता शाकंभरी देवी भूमंडल पर पौष पूर्णिमा के दिन प्रकट हुई थीं, इसीलिए पौष पूर्णिमा पर हर वर्ष मां शाकम्भरी जयंती हर्षोल्लास के साथ मनायी जाती है. ऐसे नवरात्र की पवित्र-पुनीत अवधि में भी मां शाकम्भरी की विशेष पूजन-आराधन की जाती है.

मां शाकम्भरी और हरितिमा

धर्मज्ञों की राय में हरीतिमा लिए पृथ्वी और साग सब्जियों का मूल रंग हरा है, इसीलिए मां को हरा रंग अतिशय प्रिय है. ऐसे तो पूरे देश मे माता शाकम्भरी का पूजन स्थान विद्यमान है, पर इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध सहारनपुर के शिवालिक क्षेत्र में अवस्थित मां शाकम्भरी के तीर्थ का विशेष महत्व है. साथ ही राजस्थान के मरू प्रदेश में अवस्थित सांभर में भी मां का एक पौराणिक तीर्थ विराजमान है. उत्तर भारत में नौ देवियों की यात्रा में मां शाकम्भरी देवी की भी गणना की जाती है.

जीवनदायिनी आहार और मां की कृपा

आज भले ही लोगों में मांसाहार की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन जीवनदायिनी आहार तत्वों मे साग-सब्जियों का अमूल्य स्थान है और यह मां शाकम्भरी की ही कृपा है कि साग-सब्जियों से अपना देश प्रारंभिक काल से ही सर्वसमृद्ध रहा है, जो तुष्टि पुष्टिदायक आहारों में सबसे उपयुक्त है और स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम भी.

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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