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Saraswati Vandana : सरस्वती वंदना का करें इस सही ठंग से जाप, बरसेगी स्वयं माता की कृपा

Updated at : 17 Jun 2025 11:45 PM (IST)
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Saraswati Vandana

Saraswati Vandana

Saraswati Vandana : श्रद्धा, नियम और विधि के साथ इसका पाठ करने से मां सरस्वती की कृपा से जीवन में बुद्धि, विद्या और सफलता की वर्षा अवश्य होती है. ऐसे करें माता जी का पाठ.

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Saraswati Vandana : हिंदू धर्म में मां सरस्वती को विद्या, संगीत, कला, बुद्धि और ज्ञान की देवी माना जाता है. इनकी वंदना न केवल छात्रों, शिक्षकों और कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए कल्याणकारी है जो मानसिक शुद्धता और सृजनशीलता चाहता है. सही विधि से सरस्वती वंदना करने से मां स्वयं प्रसन्न होकर साधक को आशीर्वाद देती हैं. नीचे प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से जानते हैं कि सरस्वती वंदना को कैसे सही तरीके से करना चाहिए:-

– शुद्धता और संयम का पालन करें

सरस्वती माता का संबंध शुद्ध बुद्धि और पवित्रता से है. वंदना से पहले शरीर और मन की शुद्धता आवश्यक होती है. प्रातः स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, एक शांत और साफ़ स्थान पर बैठें। मन को एकाग्र करके कुछ पल मौन साधना करें, जिससे ध्यान केंद्रित हो सके.

– सरस्वती देवी का पूजन विधि अनुसार करें

वंदना से पहले देवी की प्रतिमा या चित्र को गंगा जल से शुद्ध करें। फिर सफेद पुष्प, अक्षत, दीपक, धूप, और नैवेद्य अर्पित करें. सफेद रंग मां सरस्वती का प्रिय है, इसलिए सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है. उनके सामने बैठकर दीप प्रज्वलित करें और घंटी बजाकर वातावरण को पवित्र करें.

– वंदना पाठ करते समय उच्चारण शुद्ध रखें

सरस्वती वंदना के मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए :

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना,
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा

इस मंत्र का पाठ करते समय श्रद्धा और भक्ति की भावना होनी चाहिए, तभी इसका प्रभाव होता है.

– नियमपूर्वक नित्य वंदना करें

मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से वंदना करना अत्यंत लाभकारी है. विशेष रूप से बसंत पंचमी, पूर्णिमा, गुरुवार तथा परीक्षा काल में प्रतिदिन वंदना करना शुभ होता है. निरंतरता और नियमशीलता साधना की आत्मा है.

– वंदना के बाद ध्यान और मौन साधना करें

वंदना के उपरांत कुछ समय के लिए ध्यान करें. अपने लक्ष्य, पढ़ाई या कार्य में सफलता के लिए मां से प्रार्थना करें. शांत मन से मौन रहकर देवी की कृपा का अनुभव करें. यह समय आत्मिक शक्ति प्राप्त करने का होता है.

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सरस्वती वंदना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को ज्ञान और शांति से भर देने वाला एक दिव्य साधन है. श्रद्धा, नियम और विधि के साथ इसका पाठ करने से मां सरस्वती की कृपा से जीवन में बुद्धि, विद्या और सफलता की वर्षा अवश्य होती है.

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Ashi Goyal

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By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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