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Rukmini Ashtami 2024: इस दिन मनाई जाएगाी रुक्मिणी अष्टमी, देखें पूजा विधि

Updated at : 17 Dec 2024 8:30 AM (IST)
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Rukmini Ashtami 2024

Rukmini Ashtami 2024

Rukmini Ashtami 2024: रुक्मिणी अष्टमी का पर्व देवी रुक्मिणी को समर्पित है. इस दिन श्री कृष्ण और देवी रुक्मिणी की एक साथ पूजा करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है. इस अवसर पर माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है. इसके साथ ही, व्यक्ति को धन, वैभव, ऐश्वर्य, सुख-संपत्ति और संतान की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Rukmini Ashtami 2024:  प्रत्येक वर्ष पौष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन विशेष रूप से व्रत रखा जाता है और पूजा का आयोजन किया जाता है. रुक्मिणी अष्टमी के अवसर पर देवी रुक्मिणी और भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, जो विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं. देवी रुक्मिणी को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. यह मान्यता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन व्रत करके देवी रुक्मिणी की पूजा करने से मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं और उनकी सभी इच्छाएं पूरी करती हैं. आइए, हम रुक्मिणी अष्टमी व्रत के महत्व, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं.

2024 में रुक्मिणी अष्टमी कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पौष माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 दिसंबर, रविवार को दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो कि 23 दिसंबर, सोमवार को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी. इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी का व्रत 23 दिसंबर 2024, सोमवार को मनाया जाएगा.

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रुक्मिणी अष्टमी पूजा विधि

  • इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी की मूर्तियां स्थापित करें.
  • दक्षिणावर्ती शंख से भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का अभिषेक करें. इसके लिए केसर मिलाया हुआ दूध उपयोग में लाएँ. पंचोपचार विधि से पूजा करें.
  • देवी रुक्मिणी को लाल वस्त्र, इत्र, हल्दी और कुमकुम अर्पित करें.
  • दूध, दही, घी, शहद और मिश्री को मिलाकर पंचामृत तैयार करें. इसे किसी शुद्ध बर्तन में भरकर देवी-देवताओं को भोग अर्पित करें. ध्यान रखें कि भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी के बिना भोग नहीं लगाना चाहिए.
  • पूजा के दौरान कृं कृष्णाय नमः मंत्र या लक्ष्मी जी के मंत्रों का जाप करते रहें. अंत में गाय के घी का दीपक जलाकर, कर्पूर के साथ आरती करें और फिर ब्राह्मण को भोजन कराएं. मान्यता है कि इस पूजा विधि से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं.
  • इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की वस्तुएं भेंट करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे धन और सौभाग्य में वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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