Ravi Pushya Yoga 2026: नए वर्ष की शुरुआत यदि शुभ योग से हो, तो उसका प्रभाव पूरे वर्ष दिखाई देता है. वर्ष 2026 का आरंभ भी कुछ ऐसे ही संकेत दे रहा है. 4 जनवरी 2026, रविवार को वर्ष का पहला रवि पुष्य योग बन रहा है, जिसे भारतीय ज्योतिष में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है. यह योग कोई सामान्य शुभ तिथि नहीं है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया कार्य समय के साथ कमजोर नहीं पड़ता, बल्कि धीरे-धीरे स्थिर होकर बढ़ता है. इसी कारण इसे अक्षय फल देने वाला योग कहा गया है.
पुष्य नक्षत्र को शास्त्रों में “नक्षत्राणां श्रेष्ठः” अर्थात नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है. जब यही पुष्य नक्षत्र रविवार, यानी सूर्य के दिन आता है, तब यह रवि पुष्य योग कहलाता है. यह योग विशेष रूप से धन, व्यापार, निवेश, नौकरी, प्रतिष्ठा और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
रवि पुष्य योग कैसे बनता है?
रवि पुष्य योग केवल तिथि और नक्षत्र का मेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रहों की एक विशेष व्यवस्था कार्य करती है. इस योग में तीन शक्तियां एक साथ सक्रिय होती हैं—
सूर्य (रवि): आत्मविश्वास, नेतृत्व, ऊर्जा और अग्नि-तत्व
शनि (पुष्य नक्षत्र के स्वामी): कर्म, अनुशासन, धैर्य और स्थायित्व
बृहस्पति (पुष्य के अधिष्ठाता देव): ज्ञान, धर्म, विवेक और विस्तार
जब सूर्य की ऊर्जा, शनि की स्थिरता और गुरु की समझ एक साथ मिलती है, तब ऐसा समय बनता है जिसमें लिए गए निर्णय लंबे समय तक लाभ देते हैं. यही कारण है कि रवि पुष्य योग में शुरू किया गया कार्य बार-बार फल देता है और जल्दी असफल नहीं होता.
पुष्य नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जैसे—
- तैत्तिरीय ब्राह्मण
- बृहत्संहिता
- मुहूर्त चिंतामणि
- ज्योतिष रत्नाकर
इन सभी ग्रंथों में पुष्य नक्षत्र को पोषण और संरक्षण देने वाला नक्षत्र बताया गया है.
पुष्य शब्द का अर्थ है—
- पोषण
- वृद्धि
- सुरक्षा
मान्यता
प्राचीन काल में व्यापारी, सेठ, साहूकार और राजकोष से जुड़े लोग पुष्य नक्षत्र में ही नए सौदे और योजनाएं शुरू करते थे. माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र में दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता. इस योग में किया गया निवेश सुरक्षित रहता है और पुष्य में शुरू किया गया व्यापार लंबे समय तक चलता है.
रविवार और सूर्य का संबंध
हिंदू धर्म में रविवार को सूर्य को समर्पित माना गया है. सूर्य को आत्मा का कारक, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का स्रोत माना जाता है. साथ ही इन्हें शासन और प्रशासन का प्रतीक और अग्नि-तत्व का स्वामी भी माना गया है.
सूर्य का प्रभाव व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ता है. जब सूर्य पुष्य जैसे स्थिर नक्षत्र में होता है, तब व्यक्ति के निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर और दूरगामी लाभ को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
रवि पुष्य योग का लाभ
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रवि पुष्य योग धन को स्थिर करता है. व्यापार में निरंतर वृद्धि देता है. रुके हुए कार्यों में गति लाता है. निवेश को सुरक्षित बनाता है. साथ ही संकल्प और प्रार्थनाओं को सफल करता है.
इसी कारण इसे सोना-चांदी खरीदने, नया व्यापार शुरू करने, निवेश और अनुबंध करने, बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए सर्वोत्तम योग माना जाता है.
रवि पुष्य योग और बरगद वृक्ष का धार्मिक महत्व
भारतीय संस्कृति में बरगद को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि जीवित तीर्थ माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि बरगद के पेड़ के जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में महेश वास होता है. मान्यता है कि बरगद का पत्ता मन को स्थिर करता है. पृथ्वी और वायु तत्व को संतुलित करता है. इसमें लिखी मनोकामना को धारण करता है. इसी कारण रवि पुष्य योग में बरगद के पत्ते पर मनोकामना लिखकर अग्नि को अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है.
अग्नि-तत्व का महत्व
अग्नि को शास्त्रों में देवताओं का मुख कहा गया है. जो कुछ अग्नि को अर्पित किया जाता है, वह सीधे सूक्ष्म जगत तक पहुंचता है.रवि पुष्य योग में सूर्य स्वयं अग्नि स्वरूप होते हैं. इसलिए अग्नि के माध्यम से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है.
आवश्यक सामग्री
- बरगद का एक ताजा पत्ता
- शुद्ध देसी घी का दीपक
- कपूर या हवन सामग्री
- तांबे की छोटी कटोरी
- लाल या पीले रंग की कलम
विधि
- शुभ समय में स्नान कर पूर्व दिशा की ओर बैठें
- घी का दीपक जलाएं
- बरगद के पत्ते पर अपनी साफ़ और सच्ची मनोकामना लिखें
- अपनी राशि के अनुसार मंत्र का 11 बार जप करें
- पत्ते को अग्नि में अर्पित करें
- अंत में मन में कहें— “इदं न मम”
12 राशियों के लिए विशेष मंत्र
- मेष: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- वृषभ: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- मिथुन: ॐ गं गणपतये नमः
- कर्क: ॐ नमः शिवाय
- सिंह: आदित्य हृदय स्तोत्र
- कन्या: ॐ बुं बुधाय नमः
- तुला: ॐ शुं शुक्राय नमः
- वृश्चिक: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
- धनु: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
- मकर: ॐ शं शनैश्चराय नमः
- कुंभ: ॐ नमो नारायणाय
- मीन: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
रवि पुष्य योग 2026 का समय
- आरंभ: 4 जनवरी 2026, रविवार — दोपहर 03:11 बजे
- समाप्ति: 5 जनवरी 2026, सोमवार — सुबह 07:15 बजे
महत्वपूर्ण बात: पुष्य नक्षत्र का प्रभाव अगले दिन तक रहता है, लेकिन रवि पुष्य योग का पूर्ण और अक्षय फल रविवार को ही प्राप्त होता है.
खरीदारी और नए कार्यों के लिए शुभ
- सोना-चांदी की खरीदारी
- घर, जमीन या वाहन लेने का संकल्प
- नया व्यापार या स्टार्टअप
- निवेश और कानूनी अनुबंध
इन सभी कार्यों के लिए 4 जनवरी 2026 का रवि पुष्य योग अत्यंत शुभ माना गया है.
इस दिन क्या न करें
- विवाह और बड़े मांगलिक संस्कार
- झूठे वादे
- गुस्सा, विवाद और अपमान
- किसी को कर्ज देना
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