होली से पहले 3 मार्च को लगेगा खग्रास चंद्रग्रहण, सूतककाल में बचाव जरूरी

खग्रास चंद्र ग्रहण का असर
khagras Chandra Grahan 2026: आज 3 मार्च के खग्रास चंद्र ग्रहण का धार्मिक, पौराणिक और ज्योतिषीय महत्व जानें. सिंह राशि पर प्रभाव, सूतक काल, सावधानियां और महामृत्युञ्जय मंत्र सहित शांति के उपाय विस्तार से पढ़ें.
रघोत्तम शुक्ल
पूर्व पीसीएस, लखनऊ
khagras Chandra Grahan 2026: इस वर्ष मंगलवार, 3 मार्च को खग्रास अर्थात पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ रहा है. यह ग्रहण अपराह्न 3:21 बजे से प्रारंभ होकर संध्या 6:46 बजे तक रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार उस समय पूर्णिमा का चंद्र सिंह राशि पर गोचर करेगा और केतु द्वारा ग्रसित होगा. ग्रहण का सूतक उसी दिन प्रातः 6:20 बजे से प्रभावी हो जाएगा. शास्त्रों के मतानुसार ग्रहण काल केवल कुछ घंटों का नहीं होता, बल्कि इसका प्रभाव लगभग 15 दिन पहले से 15 दिन बाद तक माना जाता है. इस अवधि में होलाष्टक, अग्नि पंचक और भद्रा जैसे अशुभ योग भी सक्रिय बताए गए हैं. उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण पड़ चुका है, अर्थात एक पखवारे में दो ग्रहण की स्थिति बन रही है.
समुद्र मंथन की कथा और राहु-केतु का रहस्य
धर्म शास्त्रों में ग्रहण की उत्पत्ति का संबंध पौराणिक समुद्र मंथन से जोड़ा गया है. कथा के अनुसार देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्ति के लिए मंथन किया. जब धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, तो देव-दानवों में छीना-झपटी होने लगी. उसी समय स्वर्भानु नामक दैत्य ने छलपूर्वक सूर्य और चंद्रमा के बीच बैठकर अमृत की कुछ बूंदें पी लीं. सूर्य और चंद्र ने इसकी सूचना भगवान विष्णु को दी. विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया. किंतु अमृत का स्पर्श हो जाने के कारण वह मरा नहीं, बल्कि दो भागों—राहु और केतु—के रूप में जीवित रहा. तब से यह दोनों सूर्य और चंद्र को अपना शत्रु मानकर अवसर मिलने पर उन्हें ग्रसते हैं. यही घटना ग्रहण के रूप में देखी जाती है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: एक सामान्य खगोलीय घटना
विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता. चंद्रमा स्वयं प्रकाशमान नहीं है, वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है. राहु और केतु भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि सूर्य, चंद्र और पृथ्वी की कक्षाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु (नोड्स) हैं. इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है. हालांकि यह एक स्वाभाविक खगोलीय घटना है, फिर भी ज्योतिष में इसे विशेष महत्व दिया गया है. ग्रहण के समय अंतरिक्षीय विकिरणों का प्रभाव परिवर्तित माना जाता है और सूर्य-चंद्र-पृथ्वी के एक सीध में होने से गुरुत्वाकर्षण बल में विशेषता आती है. इसी कारण सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
सूतक काल में सावधानियां
सूतक काल में भोजन ढककर रखना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—वे बाहर न निकलें और परंपरा के अनुसार कुक्षि पर गेरू (गैरिक) का लेप लगाएं. ग्रहण को नग्न आंखों से देखने से भी बचना चाहिए. ज्योतिष मत के अनुसार यह समय स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकता है. मंदाग्नि, अरुचि, जलदोष, रक्त विकार, कफ और वायु संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए इस दौरान नए कार्य, नई परियोजनाएं या महत्वपूर्ण निर्णय स्थगित रखना उचित माना गया है.
किनके लिए शुभ और किनके लिए सावधानी?
चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि पर पड़ रहा है, इसलिए जिनकी सिंह लग्न या राशि है, उनके लिए यह विशेष सावधानी का संकेत देता है. उन्हें ग्रहण काल में संयम और सतर्कता रखनी चाहिए. वहीं कुछ जातकों के लिए यह लाभकारी भी सिद्ध हो सकता है. जिनका जन्मकालीन चंद्र नीच का है या छठे, आठवें अथवा बारहवें भाव का स्वामी है, उन्हें हानि के बजाय लाभ मिल सकता है. इसी प्रकार जिनका जन्म चंद्र पापग्रह से युक्त है या अकेला स्थित है, उनके लिए यह समय अनुकूल परिवर्तन ला सकता है. विशेष रूप से आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान के लिए ग्रहण काल को अत्यंत फलदायी माना गया है. होली और दीवाली की रात की भांति यह समय भी साधना सिद्धि के लिए श्रेष्ठ बताया गया है.
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अशुभ प्रभाव के शमन के उपाय
यद्यपि यह ग्रहण भारत में अल्प अवधि के लिए ही दृश्य होगा—दिल्ली में लगभग 25 मिनट—फिर भी शमन के उपाय करना हितकर है. कुप्रभावों से बचाव हेतु भगवान शिव के महामृत्युञ्जय मंत्र का जप अत्यंत प्रभावी माना गया है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्द्धनं
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
इसके अतिरिक्त केतु की शांति के लिए यह मंत्र भी जपा जा सकता है:
पलाल धूम संकाशं तारक ग्रह मस्तकम्।
रौद्रं रौद्रतरं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।
श्रद्धा और भक्ति से किया गया जप तथा दान-पुण्य अनेक अनिष्टों का निवारण कर सकता है. शास्त्रों में कहा गया है कि भक्तिपूर्वक किया गया एक प्रणाम भी बड़े से बड़े दोषों को समाप्त कर देता है.
चंद्र ग्रहण एक ओर जहां खगोलीय घटना है, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. सावधानी, संयम और श्रद्धा के साथ इस काल को व्यतीत करना ही श्रेयस्कर है. आस्था के साथ विवेक का संतुलन बनाए रखते हुए मंत्र-जप, ध्यान और दान से सकारात्मक ऊर्जा अर्जित की जा सकती है.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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