Ramadan 2024 Start: सोमवार की शाम देखा गया चांद, माह‐ए‐रमजान आज से शुरू, इन गलतियों से बचें रोजेदार
Ramadan 2024 Start: इस्लामिक कैलेंडर के नौंवे महीने को रमजान का महीना कहा जाता है, इस साल रमजान की पहली सेहरी 12 मार्च मंगलवार की सुबह खाई गई.
Ramadan 2024 Start: पाक रमजान आज 12 मार्च दिन मंगलवार से शुरू हो गया. 11 मार्च दिन सोमवार की शाम में चांद देखा गया, इसके बाद 12 मार्च से पाक-ए-रमजान का महीना शुरू हो गया. रमजान में मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बेरान कुछ भी नहीं खाते-पीते हैं, सूरज निकलने से पहले सहरी की जाती है, मतलब सुबह फज्र की नमाज से पहले खा सकते हैं. रोजेदार सहरी के बाद सूर्यास्त तक यानी पूरे दिन खाते-पीते नहीं है, इस दौरान अल्लाह की इबादत करते हैं या फिर अपने काम को करते हैं. सूरज अस्त होने के बाद इफ्तार करते हैं. हालांकि, इसके साथ-साथ पूरे जिरम व नब्जों को कंट्रोल करना भी जरूरी होता है.
माह‐ए‐रमजान आज से शुरू
इस्लामिक कैलेंडर के नौंवे महीने को रमजान का महीना कहा जाता है, इस साल रमजान की पहली सेहरी 12 मार्च मंगलवार की सुबह खाई जाएगी. सेहरी खाने के बाद पहले रोजे की शुरुआत हो जाएगी. शाम को इफ्तार के समय रोजा खोला जाएगा. जिसके बाद तरावीह नमाज की भी शुरुआत हो जाएगी. रमजान की पहली तारीख को हजरत सैयदना शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्ला अलेह की विलादत हुई आपका नाम मोहिउद्दीन जिसका अर्थ मजहब को जिंदा करने वाला होता है, आप 40 साल तक लगातार दीन की तबलीग करते रहें. उस जमाने में आपकी मजलिस में 70 हजार लोगों की भीड़ थी. आप का बयान इंसान के अलावा जिन्नात भी सुनने आते थे. आप सिलसिला कादरिया के बानी हैं. आप के सिलसिले के मानने वाले को कादरी कहते हैं. वहीं भारत के मशहूर सूफी हजरत हाफिज सैयद वारिस अली रहमतुल्ला अलेह जिनकी पैदाइश की तारीख भी एक रमजान है. हजरत वारिस पाक भी कादरिया खानदान के चश्मो चिराग थे.
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मस्जिदों में अदा की गयी तरावीह की नमाज
पूरे क्षेत्र में सोमवार को बाद नमाज मगरिब चाद नजर आते ही रमजानुल मुबारक का महीना शुरू हो चुका है. क्षेत्र की मस्जिदों में सोमवार की रात सैकड़ों की संख्या मैं लोगों ने बाद नमाज ईशा तरावीह की नमाज अदा की, इस मौके पर आमस के हमजापुर निवासी व जामिया इस्लामिया तजविदुल कुरान के संस्थापक मुफ्ती मो मोख्तार कासमी ने फरमाया कि रमजानुल मुबारक का महीना अपनी सहमतों, बरकतों और फजिलतों के साथ आ चुका है. अल्लाह-त-आला का इरशाद है रऐ ईमान वालों तुम पर रोजा फर्ज किया गया, जिस तरह तुम से पहले उम्मलों पर फर्ज किया गया था ताके तुम अपने रब से डरोर, इस उम्मत पर साल में एक महीना का रोजा फर्ज किया गया. हालाकि, पिछली उम्मतों पर छह छह माह के रोजे फर्ज थे. यह इस उम्मत पर परवरदिगार का बहुत बड़ा फजल है. अल्लाह के नबी ने फरमाया जिस ने ईमान की पोख्तगी के साथ रोजा रखा अल्लाह-त-आला उसके पिछले गुनाह को माफ कर देता है. उन्होंने फरमाया कि दूसरी हदीस में है पे लोगों तुम पर अजमत और बरकत वाला महीना साया फगन हो रहा है.
रोजेदारों को नहीं करनी चाहिए ये गलतियां
रोजेदारों के अनुसार कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है. क्योंकि रमजान के दौरान छोटी-छोटी गलतियों से भी आपका रोजा टूट सकता है. रमजान के दौरान अपशब्द नहीं कहने चाहिए. रमजान के दौरान किसी को अपशब्द कह रहे हैं तो इससे आपका रोजा रखने का लाभ नहीं मिलेगा. रमजान में रोजे रखने वाला अगर किसी को गलत निगाह से देख रहा है तो उसका रोजा टूट सकता है. रमजान के दौरान अगर कोई झूठ बोलता है या पीठ पीछे बुराई करता है तो यह भी रोजा टूटने का कारण बन सकता है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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