Paush Purnima Vrat Katha: पौष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर श्रद्धा के साथ किया गया स्नान और दान व्यक्ति के पापों का नाश करता है. इस पावन अवसर पर पूजा के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है.
पौष पूर्णिमा 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान सत्यनारायण की पूजा करते हैं. सनातन धर्म में किसी भी व्रत या उपवास को कथा के बिना अधूरा माना गया है, इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन व्रत कथा का पाठ और श्रवण विशेष फल प्रदान करता है.
गंगा स्नान और व्रत का पुण्य फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर स्नान करने से व्यक्ति पापमुक्त होता है और उसे स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है. यह दिन आत्मशुद्धि, दान और संयम का प्रतीक माना गया है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
पौष पूर्णिमा व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कार्तिका नगरी में चंद्रहाश नामक एक धर्मपरायण राजा राज्य करता था. उसी नगर में धनेश्वर नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था. उसके पास धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह अत्यंत दुखी रहता था.
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मां चंडी की कृपा से प्राप्त वरदान
एक बार नगर में एक योगी आए. उन्होंने धनेश्वर के घर को छोड़कर अन्य सभी घरों से भिक्षा ली और गंगा तट पर भोजन किया. कारण पूछने पर योगी ने बताया कि नि:संतान व्यक्ति के घर का अन्न पतितों के अन्न के समान माना जाता है. यह सुनकर धनेश्वर व्यथित हुआ और संतान प्राप्ति का उपाय पूछा. योगी के निर्देश पर उसने वन में जाकर मां चंडी की नियमित पूजा और उपवास किया. सोलहवें दिन मां चंडी ने स्वप्न में दर्शन देकर 32 पूर्णिमा व्रत करने पर संतान प्राप्ति का वरदान दिया. तभी से पूर्णिमा व्रत को सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला और विशेष फलदायी माना जाता है.

