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New Year 2026 Guru Pradosh Vrat: आज नए साल का आगाज प्रदोष व्रत से, बरसेगी शिव कृपा

Updated at : 01 Jan 2026 5:15 AM (IST)
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New Year 2026 Guru Pradosh Vrat

गुरु प्रदोष व्रत 1 जनवरी 2026

New Year 2026 Shubh Sanket: नववर्ष 2026 की शुरुआत बेहद शुभ मानी जा रही है, क्योंकि साल का पहला ही दिन गुरु प्रदोष व्रत के संयोग से बन रहा है. यह शिवभक्तों के लिए विशेष फलदायी संकेत माना जाता है.

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New Year 2026 Guru Pradosh Vrat: नववर्ष 2026 शिवभक्तों के लिए खास सौगात लेकर आ रहा है. साल की शुरुआत ही गुरु प्रदोष व्रत से हो रही है, जिसे ज्योतिष और धर्म—दोनों ही दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है. खास बात यह है कि जनवरी महीने में तीन बार प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, जिससे इस माह का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. मान्यता है कि नए साल की शुरुआत प्रदोष व्रत से होने पर भगवान शिव की विशेष कृपा पूरे वर्ष बनी रहती है.

आज है साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 31 दिसंबर 2025 को रात 1 बजकर 47 मिनट पर हो चुकी है. वहीं इस तिथि का समापन 1 जनवरी 2026 को रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, आज 1 जनवरी 2026, गुरुवार को प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. यह पौष माह का अंतिम, लेकिन साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत है.

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

शास्त्रों में गुरु प्रदोष व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से शत्रुओं का नाश होता है और साधक को ज्ञान, सौभाग्य और यश की प्राप्ति होती है. जिन लोगों के विवाह में अड़चनें आ रही हों, उनके लिए गुरु प्रदोष व्रत विशेष लाभकारी माना गया है. इसके साथ ही यह व्रत धन-समृद्धि को बढ़ाता है और कुंडली में गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करता है.

कैसे करें गुरु प्रदोष व्रत की पूजा?

प्रदोष व्रत में सायंकाल के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है. पूजा के लिए मंदिर या घर में एक चौकी पर शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान शिव को लाल और पीले फूलों की माला अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं. चंदन और कुमकुम से तिलक करें तथा सफेद मिठाई, फल और पकवान का भोग लगाएं.

ये भी पढ़ें: प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें महादेव की आरती

इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें, शिव-पार्वती की आरती करें और अंत में पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप तथा शिव चालीसा का पाठ करें. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं.

 डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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