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Maha Navami 2020: महानवमी और विजयदशमी दोनों हैं आज, जानिए नवमी-दशमी तिथि में हवन का शुभ मुहूर्त, साम्रगी, मंत्र और विधि

शारदीय नवरात्रि का आज अंतिम दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने पर यश, बल के साथ धन देती हैं. मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की अराधना के दिन बैंगनी या जामुनी वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. आज ही व्रती हवन पूजन के साथ व्रत का पारण करेंगे. हिन्दू पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर यानि आज सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक ही नवमी तिथि होने के कारण शाम को दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा.

By Prabhat khabar Digital
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Maha Navami 2020: शारदीय नवरात्रि का आज अंतिम दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने पर यश, बल के साथ धन देती हैं. मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की अराधना के दिन बैंगनी या जामुनी वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. आज ही व्रती हवन पूजन के साथ व्रत का पारण करेंगे. हिन्दू पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर यानि आज सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक ही नवमी तिथि होने के कारण शाम को दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा.

विजयादशमी का शुभ मुहूर्त

विजया दशमी 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट पर शुरू हो जाएगी. नवरात्रि का नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री धन, बल के साथ देती हैं यश, जानें माता रानी की 8 सिद्धियों से लेकर भोग, शुभ रंग और मंत्र

नवमी तिथि में शुभ मुहर्त

25 अक्टूबर सुबह 07 बजकर 41 तक नवमी की तिथि है. इसलिए महानवमी का हवन भी 25 अक्टूबर यानि आज होगा. नवमी के दिन सुबह हवन के लिए 01 घंटा 13 मिनट का समय था.

हवन साम्रगी

आम की लकड़ियां, बेल, नीम, पलाश का पौधा, कलीगंज, देवदार की जड़, गूलर की छाल और पत्ती, पापल की छाल और तना, बेर, आम की पत्ती और तना, चंदन का लकड़ी, तिल, कपूर, लौंग, चावल, ब्राह्मी, मुलैठी, अश्वगंधा की जड़, बहेड़ा का फल, हर्रे, घी, शक्कर, जौ, गुगल, लोभान, इलायची, गाय के गोबर से बने उपले, घी, नीरियल, लाल कपड़ा, कलावा, सुपारी, पान, बताशा, पूरी और खीर.

हवन विधि

हवन कुण्ड में अग्नि प्रज्ज्वलित करें, इसके बाद हवन साम्रगी गंध, धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य आदि अग्नि देव को अर्पित करें. फिर घी मिश्रित हवन सामग्री से या केवल घी से हवन किया जाता है.

आहुति मंत्र

ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा।

ओम भूः स्वाहा, इदमगन्ये इदं न मम।

ओम भुवः स्वाहा, इदं वायवे इदं न मम।

ओम स्वः स्वाहा, इदं सूर्याय इदं न मम।

ओम अगन्ये स्वाहा, इदमगन्ये इदं न मम।

ओम घन्वन्तरये स्वाहा, इदं धन्वन्तरये इदं न मम।

ओम विश्वेभ्योदेवभ्योः स्वाहा, इदं विश्वेभ्योदेवेभ्योइदं न मम।

ओम प्रजापतये स्वाहा, इदं प्रजापतये इदं न मम।

ओम अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा, इदमग्नये स्विष्टकृते इदं न मम।

News posted by : Radheshyam kushwaha

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