वैशाख मासिक शिवरात्रि है आज, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर आरती-चालीसा तक सब कुछ

Published by :Neha Kumari
Published at :15 Apr 2026 9:11 AM (IST)
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Masik Shivratri 2026

शिवलिंग की पूजा करते हुए भक्त (एआई निर्मित तस्वीर)

Masik Shivratri 2026: आज 15 अप्रैल को वैशाख मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. यदि आप यह व्रत पहली बार कर रही हैं, तो जान लीजिए कि इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे की जाती है और पूजा में किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है.

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Masik Shivratri 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है. आज का दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज वैशाख मासिक शिवरात्रि मनाई जा रही है. खास बात यह है कि आज मासिक शिवरात्रि के साथ-साथ बुध प्रदोष व्रत भी मनाया जा रहा है, जिस कारण से इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ गया है.  मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन जो भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

पूजा का शुभ मुहूर्त

चूंकि शिवरात्रि की मुख्य पूजा आधी रात को की जाती है, इसलिए निशिता काल का मुहूर्त सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 अप्रैल 2026, रात 10:31 बजे से
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 अप्रैल 2026, रात 08:11 बजे तक
  • निशिता काल पूजा समय: रात 11:59 बजे से 12:43 AM (15-16 अप्रैल की मध्यरात्रि)

पूजा सामाग्री

  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • दही, 
  • शहद
  • घी 
  • शक्कर
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • शमी के पत्ते
  • चंदन
  • अक्षत
  • भस्म 
  • धूप 
  • दीपक
  • मौली 
  • जनेऊ
  • सफेद फूल
  • फल
  • सफेद रंग की मिठाई,

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. व्रत का संकल्प लें.
  • मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें.
  • शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और बेलपत्र, अक्षत, भस्म, धतूरा, शमी के पत्ते अर्पित करें.
  • भगवान शिव के सामने दिपक और अगरबती जलाए. 
  • इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. 
  • चालीसा और व्रत कथा का पाठ करें. 
  • अंत में कपूर  जलाकर शिव जी की आरती उतारें.

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है,गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

भगवान शिव जी की चालीसा

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

श्री शिव चालीसा पाठ

जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।

स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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